महंगाई ने छीना निवाला, दिल्ली सहित कयी राज्यों के हर तीसरे बेरोजगार की कहानी | 100 टके की बात |

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Ep12:|100टके की बात| महंगाई ने छीना निवाला:दिल्ली,हरियाणा-राजस्थान सहित कयी राज्यों के हर तीसरे बेरोजगार की कहानी पारितोष कुमार के साथ

देश के कयी राज्यों में बेरोजगारी के कारण से तो परेशान थे हीं साथ हीं महंगाई के कारण लोगों के जीवन में आफत आ गयीं है़।

हलाकि सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) के आंकड़ों के अनुसार इस समय राष्ट्रीय स्तर पर बेरोजगारी दर में कुछ सुधार आया है। अब यह 10.8 फीसदी पर पहुंच गया है। मई माह के अंत में यह 11.9 फीसदी पर पहुंच गया था।आपको बता दें कि योग दीवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश-दुनिया को योग करने का संदेश दिया। लेकिन उनका ये संदेश उन लोगों के किस काम का जिनके पास इस समय कोई नौकरी नहीं है और इस बढ़ती महंगाई ने उनके मुंह का निवाला छीन लिया है। आर्थिक गतिविधियों में सुस्ती के कारण इस समय बेरोजगारी चरम पर है। देश की राजधानी दिल्ली में बेरोजगारी दर 45.6 फीसदी तक पहुंच गई है, यानि यहां का लगभग हर दूसरा आदमी बेरोजगार है। हरियाणा में बेरोजगारी दर 29.1 फीसदी, तमिलनाडु में 28 फीसदी और राजस्थान में 27.6 फीसदी हो गई है। इसका अर्थ है कि इन राज्यों में लगभग हर तीसरे व्यक्ति के पास कोई काम नहीं है।

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (CMIE) के आंकड़ों के अनुसार इस समय राष्ट्रीय स्तर पर बेरोजगारी दर में कुछ सुधार आया है। अब यह 10.8 फीसदी पर पहुंच गया है। मई माह के अंत में यह 11.9 फीसदी पर पहुंच गया था। शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी दर 12.9 फीसदी और ग्रामीण क्षेत्रों में 9.8 फीसदी तक पहुंच गई है। ज्यादा बेरोजगारी वाले राज्यों में आंध्र प्रदेश में 13.5 फीसदी, बिहार में 13.8 फीसदी, गोवा में 20.6 फीसदी, जम्मू-कश्मीर में 12.1 फीसदी, झारखंड में 16 फीसदी, केरल में 23.4 फीसदी, पुडुचेरी में 24 फीसदी, त्रिपुरा में 20 फीसदी और पश्चिम बंगाल में 19.3 फीसदी हो चुकी है।
सबसे कम बेरोजगारी वाले राज्यों में असम सबसे ऊपर है जहां केवल 0.1 फीसदी लोगों ने कहा कि उनके पास कोई रोजगार नहीं है। इसके बाद गुजरात में 2.3 फीसदी, कर्नाटक में 5.3 फीसदी, मध्यप्रदेश में 5.3 फीसदी, ओडिशा में 7 फीसदी, उत्तराखंड में 5.5 फीसदी और उत्तर प्रदेश में 6.9 फीसदी लोग बेरोजगार हैं।..सवालयह है़ कि क्या
क्या घटेगी बेरोजगारी या यूं ही लोग परेशान रहेंगे.. दरअसल सूत्रों की माने तो बाज़ार में अभी भी अनिश्चितता का माहौल है। व्यापार में ढील देने से बाज़ार खुले हैं, लोग बाज़ारों में पहुंच रहे हैं, लेकिन लोगों के हाथ में नकदी नहीं है, लिहाजा लोग खर्च करने से बच रहे हैं और बाज़ार में तेजी नहीं आ रही है।
कोरोना की तीसरी लहर के आने के समय और इसके असर को लेकर लोगों में अनिश्चितता है। देश के शीर्ष वैज्ञानिक-डॉक्टरों ने दो-तीन महीने में दोबारा कोरोना की लहर आने की आशंका व्यक्त की है। इस माहौल में व्यापारी बाज़ार में पैसा लगाने से बच रहा है क्योंकि अगर कोरोना की तीसरी लहर ज्यादा भयावह हुई और इसके कारण लॉकडाउन लगाना पड़ा तो व्यापारियों को डर है कि उनका पैसा लंबे समय के लिए फंस सकता है। इससे भी बाज़ार में सुस्ती बनी हुई है।..इन सब सवालों के घेरे में आखिर कैसे बेरोजगारी..यह माना जा रहा है कि देश के विभिन्न हिस्सों में लॉकडाउन में छूट दिए जाने के कारण इस दौरान आर्थिक गतिविधियां बढ़ी हैं और इसके कारण बेरोजगारी दर में कमी आई है। मई माह की तुलना में जून माह में अब तक बेरोजगारी दर में गिरावट दर्ज की गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में धान की बुवाई के कामकाज शुरू होने से वहां भी बेरोजगारी दर में कमी आई है। दिल्ली सहित देश के विभिन्न राज्यों में आज से अन्य क्षेत्रों की आर्थिक गतिविधियों में भी छूट मिल रही है, इसलिए उम्मीद की जा रही है कि अब बेरोजगारी दर में गिरावट आएगी।.
वैसे बेरोजगारी की बात को उठाना ठीक वैसे हीं है़ जैसे आग में घी डालना.. जी हाँ बेरोजगारी एक ज्वलंत मुद्दा है़ हमारे देश का.. और जब इसकी बात होती है़ तो कईयों के खून खौलने लगते हैं.. क्यूंकि स्पष्ट तौर पर देखा जाए तो इस समस्या का निदान सरकार के पास नहीं है़ और न हीं इस नीति पर कोई ठोस कदम उठाया जा रहा है़.. अब देखना यह है़ कि हमारे देशवासी इस समस्या से निजात कब तक पाते हैं या यूं भूखो मरने की स्थिति तो बनती जाएगी।