जम्मू कश्मीर में भड़की सियासत की आग,क्या J&K होगा अलग,जानिए इनसाइड स्टोरी…

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गृह मंत्री अमित शाह के मीटिंग के बाद अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सर्वदलिय मीटिंग  बुलाई है। यह मीटिंग 24 जून  को होंगी। यह मीटिंग में संभवतः आगामी विधान सभा चुनाव को ले कर कूछ अहम् फैसले लिए जा सकते हैं. मना यह भी जा रहा है की इस बैठक में जम्मू से कश्मीर  को अलग कर देने की बात पर चर्चा होंगी। दरअसल जम्मू के लोगों का कहना है की राजनितिक पहलु से कश्मीर जम्मू पर भाड़ी परता है और जम्मू की बातें सुनी नहीं जाती लिहाजा जम्मू को कश्मीर से अलग करने की मांग हो रही है। हालांकि मांग पुरानी है, बीजेपी और शिवसेना एक लम्बे वक़्त से जम्मू को कश्मीर से अलग करने की मांग कर रही है मगर अब विधानसभा चुनाव से पहले इस चिंगारी को और हवा दी जा रही है। यहाँ तक की इस मांग पर विचार करते हुए केंद्र सरकार ने परिशीमन आयोग का गठन भी हुआ है जो इस समस्या के निवारण करने के लिए बिधानसभा के सभी सीटों पर विचार कर रहा है। इसके साथ 24 सीटों  के साथ साथ कश्मीरी पंडितों को भी अलग से सीट देने की मांग कर रही है।

आइये हम आपको समझाते हैं की कैसे हो सकता है विधानसभा की सीटों को बटवारा.. दरअसल  अनुच्छेद 370 और 35 अ के हटने से पहले जम्मू कश्मीर विधानसभा में कुल 87 सीटे हुआ करती थी जिसमे कश्मीर को 46, जम्मू को 37 और लद्दाख को 4 सीटें प्राप्त थी मगर लद्दाख के अलग केंद्रिसाषित प्रदेश बनाने के बाद जम्मू और कश्मीर विधानसभा में केवल 83 सीटें ही बच गई । और अब जब परिसीमन आयोग नए विधानसभा क्षेत्रों का निर्माण करेगा तो विधानसभा की कुल सीटें 90 के पास पहुंच सकती है। हालांकि तब भी बिधानसभा में कश्मीर की ही बहुमत रहेगी क्यूंकि तब भी कश्मीर  के जिम्मे सीटों की संख्या ज्यादा है। लिहाजा लोग जम्मू और कश्मीर को अलग करने की मांग हो रही है। लोगों ने यह भी मांग उठाया है की के लिए जो 24 सीटें खाली  रहती हैं उनमे से एक तिहाई सीटें यानी 8 सीट जम्मू को दे दिए जाए और उन सीटों पर वोट  उन्ही के होंगे जो से POK ताल्लुक रखते हैं। अगर इस गणतीय समीकरण का तालमेल बैठ जाता है तो जम्मू का पलड़ा  भरी होता हुआ दिखाई देगा। इसे ऐसे समझते हैं की J&K विधानसभा में जम्मू के वर्तमान  में 37 सीटें हैं अगर POK के आरक्षित  सीटों में से एक तिहाई यानी 8 सीटें मिलती हैं तो जम्मू के पास  कुल सीटों की संख्या 45 हो जाएंगी और साथ ही परिसीमन आयोग द्वारा बताई गई 7 सीटों का कूछ हिस्सा भी जम्मू को मिल सकता है जिसके बाद जम्मू राजनितिक परिदृश्य  से मजबूत होता दिखाई दे रहा है। मांग यह भी है की यदि POK के आरक्षित  सीटों में से जम्मू को एक तिहाई सीट नहीं मिलता है तो फिर कश्मीरी पंडितों  के लिए कश्मीर के सीटों  में से कम से कम तीन सीटें आरक्षित  की जाए जिन पर कश्मीरी पंडित वोट कर सके। अब जम्मू कश्मीर का आने वाला भविष्य  क्या होगा यह 24 जून के प्रधानमंत्री सर्वदलिय बैठक के बाद ही पता चल पायेगा। अमित शाह के हाई लेवल मीटिंग में NSA अजित डोभाल  के साथ कई अधिकारी और सेना नायक शामिल हुए थे जिसके बाद ही जम्मू कश्मीर के राजनितिक समीकरण में उतार चढाव दिख रहा है। और अब 24 जून को होने वाले सर्वदलिय बैठक की ख़बर इस बात का संकेत दे रहा है की J&K में कूछ बड़ा  होने वाला है,… हो सकता है की J&K को फिर से बिशेष राज्य देने की बात पर चर्चा हो। और वहाँ पर रुकी हुई चुनावी प्रक्रिया को फिर से बहाल  की जा सकती है।… खैर नतीजे क्या होंगे यह तो 24 जून के बैठक के बाद ही पता चल सकता है।

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