Audit में सामने आया Arya Bhatt University का घोटाला, कंप्यूटर-अलमीरा खरीद में करोड़ों की हेराफेरी

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Scam in Universities: आर्यभट्ट विश्वविद्यालय की ऑडिट में यह बात सामने आई कि 62.46 लाख रुपए के डेस्कटॉप कंप्यूटर की खरीद में टेंडर नियम का पालन ही नहीं हुआ.

बता दें कि 30 लाख रुपए से ज्यादा के सामानों की खरीद में अनिवार्य रूप से GeM पोर्टल पर बिडिंग की जानी चाहिए. ऑडिट रिपोर्ट में बताया गया है कि विश्वविद्यालय ने ऐसा नहीं किया. बल्कि विश्वविद्यालय ने 2019 में मेसर्स ग्राफिक ट्रेडर्स प्राइवेट लिमिटेड से बिना टेंडर के 100 डेस्कटॉप कंप्यूटर की खरीदारी की.

पटना. आर्यभट्ट विश्वविद्यालय में करोड़ों रुपए के फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है. 2017 से लेकर 2022 के बीच हुई खरीद की ऑडिट में यह घोटाला सामने आया. ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक, डेस्कटॉप कंप्यूटर और फायर रेसिस्टेंट अलमीरा की खरीद में एक करोड़ से ज्यादा का फर्जीवाड़ा किया गया है. 2017 से लेकर 2022 तक की खरीद की ऑडिट में यह बात सामने आई कि डेस्कटॉप कंप्यूटर की खरीद बिना टेंडर निकाले की गई, जबकि अलमीरा की खरीद में वे सारे नियम ताक पर रख दिए गए, जिनका पालन किया जाना चाहिए था. प्रिंसिपल ऑडिट जनरल ने विश्वविद्यालय से कई सवालों के जवाब मांगे हैं.

आर्यभट्ट विश्वविद्यालय की ऑडिट में यह बात सामने आई कि 62.46 लाख रुपए के डेस्कटॉप कंप्यूटर की खरीद में टेंडर नियम का पालन ही नहीं हुआ. बता दें कि 30 लाख रुपए से ज्यादा के सामानों की खरीद में अनिवार्य रूप से GeM पोर्टल पर बिडिंग की जानी चाहिए. ऑडिट रिपोर्ट में बताया गया है कि विश्वविद्यालय ने ऐसा नहीं किया. बल्कि विश्वविद्यालय ने 2019 में मेसर्स ग्राफिक ट्रेडर्स प्राइवेट लिमिटेड से बिना टेंडर के 100 डेस्कटॉप कंप्यूटर की खरीदारी की.

70.80 लाख के अलमीरा खरीद में भी धांधली..
आर्यभट विश्वविद्यालय ने न सिर्फ कंप्यूटर बल्कि 70.80 लाख रुपए के फायर रेसीसटेंट अलमीरा की खरीद में भी फर्जीवाड़ा किया. विश्वविद्यालय की ऑडिट में यह बात सामने निकलकर आई है कि इसकी निविदा के लिए विज्ञापन इंडियन ट्रेड जेनरल और एक राष्ट्रीय अखबार में कराना था, जो नहीं कराया गया. साथ ही टेंडर में 3 एजेंसियों को योग्य पाया गया. जांच में यह पाया गया कि एक ही मूल उत्पादक फर्म GUARWEL INDUSTRIES PVT LTD MUMBAI के प्रतिनिधि के रूप में तीनों एजेंसियां ने भाग लिया. जबकि केंद्रीय सतर्कता आयोग के परिपत्र सं 03.01/12 के अनुसार एक निविदा में केवल एक ही फर्म आवेदन कर सकता है. इसके साथ ऑडिट में यह भी बात सामने आई कि बिड खोले जाने के दिन सभी संवेदकों की उपस्थिति संबंधित प्रमाण संचिका में नहीं पाई गई. इन तमाम अनियमितताओं को सामने रखते हुए प्रिंसिपल ऑडिट जेनरल ने विश्वविद्यालय से तमाम बिंदुओं पर जवाब मांगा है.

विश्वविद्यालय कर रहा जवाब की तैयारी
ऑडिट में सामने आए तमाम फर्जीवाड़ा के बाद विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार ने बताया कि ऑडिट में कई सवाल किए गए हैं, इनका जवाब विश्वविद्यालय द्वारा तैयार किया जा रहा है.