भारत ने श्रीलंका के आर्थिक संकट की स्थिति में मदद कर , निभा रहा है बड़े भाई का फर्ज। जानिए पूरी रिपोर्ट।

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अत्यधिक आर्थिक संकट की स्थिति झेल रहे श्रीलंका में अभी बहुत ज्यादा महँगाई बढ़ गई हैं ऐसे में वहा लोग दाने-दाने के लिए मोहताज हो गए हैं। ऐसे में भारत एक अच्छे पड़ोसी और बड़े भाई की भूमिका निभाते हुए लगातार श्रीलंका की मदद करने में लगा हुआ है।

भारत ने श्रीलंका को चावल की मदद की।

भारत ने श्रीलंका के राष्ट्रीय नये वर्ष की शुरुआत से पहले मंगलवार को 11,000 मीट्रिक टन चावल की बोरी भेजवायी श्रीलंका को यह मदद 1 अरब डॉलर के रियायती भारतीय ऋण सुविधा के तहत दी गई। श्रीलंका के अफसरों ने चावल की बोरी लेते हुए भारत सरकार और भारतीय जनता का शुक्रिया किया, जो इस बुरे वक्त में भी उनका साथ दे रहे हैं।

भारत ने श्रीलंका को गेहूं और दवा भेज कर भी की मदद।

श्रीलंका को आर्थिक मदद से उबारने के लिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और श्रीलंका सरकार के बीच 17 मार्च 2022 को समझौता हुआ था।इस समझौते में भारत की ओर से 1 अरब डॉलर का रियायती ऋण सुविधा दी गई थी। जिसकी मदद से श्रीलंका को भारत से 40 हजार मीट्रिक टन अनाज मंगवाना है। इसमें से 5 हजार मीट्रिक टन गेहूं पिछले दिनों श्रीलंका भेजा जा चुका है।

अब 11 हजार मीट्रिक टन गेहूं की दूसरी बोरी और भेजी गई श्रीलंका का स्टेट ट्रेडिंग कॉरपोरेशन इस गेहूं को अब अपने देश की जनता तक पहुंचाने का इंतजाम करेगा। कोलंबो में भारतीय उच्चायोग ने गेहूं की इस सप्लाई पर कहा, यह आपूर्ति भारत के उन वादों का हिस्सा है, जिसमें श्रीलंका को संकट से उबारने के लिए ईंधन, दवा और आर्थिक मदद की बातें शामिल हैं।

गेहूं की तरह चावल की डिलीवरी भी समझौता होने के एक महीने के अंदर ही कर दी गई थी। भारतीय उच्चायोग के अधिकारियों ने कहा, ‘सिंहली और तमिल नव वर्ष से पहले गेहूं की दूसरी बोरी की आपूर्ति कर दी गई । यह सप्लाई श्रीलंका को एनर्जी और फूड सिक्योरिटी के मामले में मदद पहुंचाने के भारत के वादे के अनुरूप की जा रही है।