फिर से भाजपा से हाथ मिलाएंगे मुख्यमंत्री नितीश कुमार ; प्रशांत किशोर

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1977 में लेख टंडन की एक फिल्म आई जिसका नाम था दुल्हन वही जो पिया मन भाये यानी की दुल्हन वही अच्छी है जो उसके पिया को अच्छी लगे। अब इस फिल्म का नाम ऐसा क्यों है, ये आपको फिल्म देखने बाद ही पता चलेगी परन्तु इस फिल्म के नाम पर बिहार की राजनीती जरूर देखने को मिल सकती है। दरअसल बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार और उनकी पार्टी पर यह टाइटल आज कल बिलकुल फिट बैठ रहा है। नितीश कुमार अपनी पार्टी के लिए मन भाने लायक कोई दुल्हन नहीं ढूंढ पा रहें हैं। हमने हाल ही में नितीश कुमार की पार्टी जदयू का भाजपा से गठबंधन तोड़ राजद से हाथ मिलाने और सरकार बनाने तक का सफर देखा है और अब एक दफा फिर नितीश कुमार के पार्टी का वापस भाजपा में विलय होने के कयास लगाए जा रहें है। और अगर ऐसा है तो यह कहने में कोई हर्ज नहीं है की नितीश कुमार अपनी पार्टी के लिए सही दुल्हन या यूँ कहे की हमसफ़र नहीं ढूंढ पा रहें हैं।

प्रशांत किशोर ने किया दावा

दरअसल सियासी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने बिहार के CM नीतीश कुमार पर नया दावा किया है की जल्द ही नितीश कुमार एक बार फिर भाजपा के साथ गठबंधन कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि नीतीश ने JDU सांसद और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह के जरिए भाजपा के साथ बातचीत की एक लाइन खुली रखी है। हालाँकि जदयू ने इस दावे को गलत बताया है परन्तु प्रशांत किशोर लगातार यह दावा कर रहें है की अगर स्थिति की मांग होती है तो नितीश कुमार फिर से भाजपा पार्टी के साथ गठबंधन कर सकते हैं।

जदयू ने किशोर के दावे को किया खारिज

प्रशांत किशोर के इस बयान पर जदयू पार्टी प्रवक्ता केसी त्यागी ने कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की है कि वह अपने जीवन में फिर कभी भाजपा से हाथ नहीं मिलाएंगे. इसके अलावा त्यागी ने कहा, ‘हम उनके दावों का खंडन करते हैं. नीतीश कुमार 50 साल से अधिक समय से सक्रिय राजनीति में हैं और प्रशांत किशोर छह महीने से. किशोर ने भ्रम फैलाने के लिए इस तरह की भ्रामक टिप्पणी की है। अब प्रशांत किशोर और जदयू के बयान नदी के दो किनारे जैसे लग रहे हैं परन्तु राजनीती अनिश्चितताओं से भरी पड़ी है।

गठबंधन बनाने और तोड़ने का पुराना इतिहास

नितीश कुमार का किसी पार्टी से टूटने और किसी पार्टी में मिलने का इतिहास लम्बा रहा है और साथ ही प्रशांत किशोर की राजनीतिक भविष्यवाणी भी काफी हद तक सही रहती है। और यह भी गौर करने वाली बात है की प्रशांत किशोर और नितीश कुमार ने काफी लम्बे समय तक एक दूसरे के साथ मिलकर बिहार की राजनीती को चलाया है तो यह कहना गलत भी नहीं होगा की नितीश कुमार किस तरह से सोचते हैं इसका इल्म प्रशांत किशोर को नहीं होगा। फिलहाल नितीश कुमार और उनकी पार्टी कौन सा कदम आगे बढ़ाएगी ये देखना होगा।