क्या है हकीकत गुड्डू यादव और चिराग पासवान के मुलाकात के पीछे ? MLC चुनाव में हो सकता है बड़ा उलटफेर

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जमुई में शनिवार के एक राजनीतिक घटनाक्रम से जिले की सियासत गरमा गई है। वैसे एक अन्य घटनाक्रम भी राजनीतिक हलकों में चर्चें में है। लोग अपने अपने हिसाब से इन दोनों घटनाक्रमों के निहितार्थ निकाल रहे हैं। दरअसल शनिवार को सांसद चिराग पासवान जमुई पहुंचे तो कचहरी चौक पर बाबा साहब आंबेडकर को श्रद्धांजलि दी। उसके बाद वे दिवंगत विधायक अभय सिंह की पुण्यतिथि पर श्रद्धा सुमन अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। फिर जिला परिषद अध्यक्ष दुलारी देवी के सिकंदरा स्थित आवास पर पहुंचे। वहां उनकी मुलाकात अध्यक्ष के पति गुड्डू यादव से हुई यहां यह बताना लाजिमी है कि अभय सिंह चिराग पासवान के धुर विरोधी सुमित कुमार के अग्रज तथा पूर्व मंत्री नरेंद्र सिंह के पुत्र थे। गुड्डू यादव भी मंत्री सुमित के खास माने जाते हैं। उन्होंने विधान परिषद चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में ही राजद और जदयू से दो-दो हाथ करने का ऐलान कर रखा है।

जिप अध्यक्ष चुनाव में सुमित की महती भूमिका को गुड्डू यादव ने भी स्वीकारा था। अब सवाल उठता है कि कहीं चिराग और सुमित के बीच कोई खिचड़ी तो नहीं पक रही है? इसके पीछे मुख्यमंत्री का हालिया दौरा भी अहम है, जो कई कारणों से राजनीतिक चर्चाओं में है। खासकर स्थापना दिवस सह समाजवादी नेता श्रीकृष्ण सिंह की जयंती समारोह के तीसरे दिन ही मुख्यमंत्री के जमुई आगमन के कई अर्थ निकाले जा रहे हैं। बहरहाल गुड्डू यादव के घर पहुंचे चिराग पासवान ने बिहार विधान परिषद के चुनाव में अकेले मैदान में उतरने की बात कही है। साथ ही किसी भी प्रकार की चुनावी खिचड़ी पकने के सवाल को मजाकिया लहजे में बड़े आराम से टाल गए। उन्होंने किसी प्रकार की खिचड़ी पकने से इंकार करते हुए कहा कि अगर कोई खिचड़ी पकेगी तो सभी को खिलाई जाएगी।
इधर गुड्डू यादव ने कहा कि चिराग पासवान हमारे क्षेत्र के सांसद हैं। उनसे विकास के सवाल पर उनकी बातें हुई हैं। वैसे इस मुलाकात से कुछ लोग यह कयास लगाने से बाज नहीं आ रहे हैं कि गुड्डू को विधान परिषद चुनाव में चिराग का समर्थन हासिल हो सकता है। बहरहाल इस राजनीतिक घटनाक्रम का दूरगामी प्रभाव क्या पड़ेगा, यह तो वक्त ही बताएगा। लेकिन, तत्काल चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है