बिजली संकट से बचाने 52 डिग्री तापमान में 400 रेलवे लोको पायलट ढो रहे कोयला, पढ़ें- संघर्ष की कहानी

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आम आदमी औसतन 40 डिग्री की गर्मी नहीं झेल पा रहा है, वहीं देश के बिजली घरों को रौशन करने के लिए कोयला ढोने में लगे लगभग 400 लोको और सहायक लोको पायलट 45 से 52 डिग्री तापमान के बीच घंटों कार्य कर रहे हैं. ताकि देश में बिजली संकट उत्पन्न न हो. लगातार काम कर लोको पायलट बिजली कंपनियों को कोयला सप्लाई कर रहे हैं.

कोरबा. बिजली कंपनियों में कोयले की कमी ओर बिजली संकट की आहट को देखते हुए कोयले की सप्लाई तेज करने का दावा किया जा रहा है. बिलासपुर रेल मंडल के आंकड़े के अनुसार लगभग साढ़े तीन हजार लोको और सहायक लोको पायलट हैं. इनमें से 60 प्रतिशत को सिर्फ कोयला ढोने में लगाया गया है. पूरे देश में बिजली की मांग बढ़ने से थर्मल पावर प्लॉटों में कोयले की कमी बताई जा रही है. कोयले की कमी से बिजली का उत्पादन बाधित न हो इसके लिए साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड के साथ मिलकर रेलवे पावर प्लांटों में कोयले का स्टॉक पहुंचाने में लगा हुआ है.

बता दें कि कोरबा में लगभग एक हजार रनिंग कर्मचारी: बताया जा रहा है कि कोरबा जिले में ही लगभग एक हजार से अधिक रनिंग स्टॉफ है, जो लोको पायलट, सहायक लोको पायलट, गुड्स गार्ड आदि के पद पर कार्यरत हैं. कर्मचारियों के स्वास्थ्य के लिए एसी लगाया जाना था।यहां लगभग 550 लोको और सहायक लोको पायलट हैं. भीषण गर्मी के चलते इंजन क्रू मेंबर बीमार हो रहे हैं. रेल चालक दल 15 से 18 घंटे तक बिना एसी कूलर पंखे के इस दहकती भट्टी में बैठकर कोयला ढो रहे हैं. ड्यूटी के दौरान काम करते वक्त लोको पायलट 6 से 7 लीटर पानी पीते हैं. इसके बाद भी इनका गला सूखता रहता है.