नहाय खाय के साथ आज से सुरु हुआ छठ पूजा, देश नहीं बल्कि विदेशों में भी मनाया जा रहा है छठ पूजा।

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छठ पर्व भारत में ही नहीं बल्कि पुरे विश्व में प्रसिद्ध है। विश्व के जिस कोने में बिहारी मौजूद हैं वहां यह छठ पर्व बड़ी लगन और नियम से मनाया जाता है। 3 दिन का यह पर्व सिर्फ पर्व नहीं है बल्कि वह इमोशन है जिसके साथ लोग कोई समझौता करने के लिए तैयार नहीं होते हैं। एक बिहारी देश या दुनिया के किसी भी कोने में क्यों न हो वह छठ पर्व को पूरी श्रद्धा के साथ मानता है। 3 दिन का यह पर्व आज यानी नहाय खाय से सुरु हो चूका है। आज के दिन छठ व्रती स्नान कर बिना लहसुन प्याज से बने भोजन को ग्रहण करते हैं। उसके बाद तीन दिन तक निर्जला व्रत रखते हैं। इसके साथ ही ठेकुआ पूरी और फलों के साथ उगते हुए सूर्य तथा डूबते हुए सूर्य को अर्घ देते हैं। उगते हुए सूर्य को नमस्कार तो हर कोई करता है पर डूबते हुए सूर्य की पूजा करना सिर्फ छठ पूजा में ही देखा जाता है।

द्रौपदी ने किया था पहली बार छठ

पौराणीक कथाओं के अनुसार छठ पूजा का सम्बन्ध महाभारत से हैं। कहते हैं की जब पांडव जुए में अपना सब कुछ हार गए तब द्रौपदी ने छठ व्रत रखा और उनके मनोकामना और छठ पूजा का ही प्रतिफल था की पांडवो को अपना राजपाट वापस मिला। जिसके बाद से ही छठ पूजा का महत्व बढ़ा गया और आज लोग इसे बड़े ही नियम कानून से मनाते हैं। पौराणिक कथाओं में यह लिखित है की सूर्य देव और छठी मैया भाई बहन है। छठ व्रत एक बिहारी के लिए कितना जरुरी होता है की पुरे साल घर से बाहर रहने वाला मजदूर छठ पूजा में ट्रेन में धक्के खाते अपने घर वापस आ जाता है। पुरे साल चेहरे पर मायूसी लिए रहने वाला इंसान छठ पूजा आते ही खिल उठता है। सच में कितना पावन होता है ये छठ पूजा।