तुम वो त्याग हो जिसे कोई शब्द बयाँ नहीं कर सकता।Happy Father’s Day. TD News/ Today’s Special.

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पिता महज एक शब्द ही नहीं है यह एक दुनिया जो पूरी तरह से उस इंसान के आगोस में सुरक्षित है जिसे लोग पिता कहते हैं। पिता के बलिदान को चंद शब्दों में बयां कर पाना मुश्किल नहीं बल्कि नामुमकिन है। दरअसल किसी शब्द की उतनी औकात ही नहीं जो ये बता सके की पिता क्या होता है। शायद ऐसा कोई शब्द ही नहीं है जो पिता के त्याग का वर्णन कर सके। पिता वो शख्स है जो हमेसा खुद से पहले अपने बच्चे को देखता है। पिता तपती रेत का वह माली है जो खुद के कंठ भिगोये बिना औलाद नाम के पौधे को सींचता है। पिता जेठ की भरी दोपहरी का वह साया है जिसके छावं में कई जिंदगियां झुलसने बचती है ,पिता पुश की रात का वह कम्बल है जिसके आगोस में औलाद बेफिक्र सो जाता है ,माँ की ममता को हर कोई जानता है पर पिता के त्याग को कोई नहीं पहचान पाता ।