बिहार का वाल्मीकि नगर, जहां की खूबसूरत वादियों के आप दीवाने हो जाएंगे.देखिए पूरी जानकारी

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बिहार की जब बात आती है, तो कहते हैं कि यहां घूमने लायक क्या है. तो आज आपको बताते हैं बिहार के पर्यटन स्थल वाल्मीकि नगर के बारे में. गंडक नदी के किनारे बसा वाल्मीकि नगर बेहद ही खूबसूरत वादियों से घिरा है. यह एक छोटा सा कस्बा है, जहां की आबादी कम है और यहां का ज्यादातर भाग वन के अंदर है.
भारत नेपाल सीमा पर स्थित वाल्मीकि नगर का प्राकृतिक सौंदर्य और वातावरण बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की भी पहली पसंद है. इसका कारण है 900 वर्ग किलो मीटर में फैला विशाल जंगल, झरना, पहाड़ और नदी. ये नदी भी कोई साधारण नदी नहीं है. शास्त्रों में इसे नारायणी कहा गया है. अर्थात वह नदी जिसमें स्वयं नारायण निवास करते हैं. भारतीय क्षेत्र में जब ये नदियां प्रवेश करती हैं तो यहां तीन नदियों का संगम होता है और इसी संगम क्षेत्र में भगवान शालिग्राम मिलते हैं.
कीमती लकड़ियों से आबाद है ये जंगल 
वाल्मीकि नगर का जंगल टाइगर रिजर्व के रूप में अति संरक्षित वनों में से एक है. जैव विविधता और साल तथा सागवान, खैर, शीशम जैसी कीमती लकड़ियों का घना जंगल  प्रकृति प्रेमियों को मोहित कर लेता है. 


यहां पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री ने बहुत सारे कार्य किये हैं. जिसमें जंगल सफारी, ट्री हट, बंबू हट, नौकायन और विशाल गंडक नदी के किनारे पर पाथवे का निर्माण के साथ मनोरंजन पार्क, चिल्ड्रन पार्क, ध्यान स्थल, झूला पुल आदि उल्लेखनीय हैं. 
वाल्मीकि नगर का पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व
रत्नाकर डाकू से महात्मा बने महर्षि वाल्मीकि का आश्रम यही है. जहां अयोध्या से निर्वासित सीता की शरणस्थली और लवकुश की जन्मस्थली का अपना विशेष महत्व है. ऐसी मान्यता है कि आदि कवि महर्षि वाल्मीकि ने क्रोंच पक्षी के आहत होने के बाद पृथ्वी पर पहली श्लोक की रचना यही पर की थी. इसी आश्रम में महर्षि ने राम के जन्म से पूर्व ही रामायण की रचना की थी. अश्वमेध का घोड़ा भी लवकुश ने यहीं रोका था. 
नर देवी माता का मंदिर
वाल्मीकि नगर में ही आदिशक्ति मां दुर्गा का एक दिव्य मंदिर घने जंगलों के बीच स्थित है. जो कई दृष्टिकोण से ऐतिहासिकता को अपने आप में समेटे हुए है. इस मंदिर को नर देवी के नाम से जाना जाता है.
जटाशंकर महादेव मंदिर
यहां स्वयंभू महादेव का प्राचीनतम मंदिर है, जो एक ही पत्थर से बना हुआ है. यह घने जंगलों के बीच गंडक नदी के करीब आदिकाल से स्थित है. इससे थोड़ी दूर पर गंडक नदी के तट पर कवलेश्वर नाथ का मंदिर है, इसके विषय में मान्यता है कि यह राजा से वैराग्य लिए भरथरी ने बनवाया था. इसके अतिरिक्त भी कई तीर्थ स्थल हैं. जहां श्रद्धालु जाकर देवी देवताओं के दर्शन करते हैं. 
मुख्यमंत्री का विशेष पसंदीदा स्थल
विटीआर के रघिया वन क्षेत्र का ललमटिया यह स्थल सनराइज देखने के लिए अद्भुत है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जब पहली बार अनायास ही वनभ्रमण के क्रम में इस स्पॉट पर पहुंचे तो यहा का दृश्य देखकर भाव विभोर हो गए. साथ में चल रहे वन विभाग के पदाधिकारी तथा जिला प्रशासन से इस पर चर्चा की और इसको विकसित करने की रूप रेखा बनाई.
आपको बताते चले कि
प्रकृति की गोद में बसे वाल्मीकिनगर की फिजा पर्यटकों के लिए किसी जन्नत से कम नहीं है। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व बिहार का इकलौता और भारत के प्रसिद्ध प्राणि उद्यानों में से एक है। 880 वर्ग किलोमीटर जंगल का 530 वर्ग किलोमीटर इलाका बाघ परियोजना के लिए आरक्षित है। जंगल सफारी के दौरान पर्यटकों को बाघों का दीदार रोमांच पैदा करता है। नेपाल और यूपी की सीमा पर स्थित यह टाइगर रिजर्व प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है। सर्दियों के मौसम में यहां से हिमालय पर्वत श्रृंखला का दीदार कश्मीर की हसीन वादियों की याद ताजा करा देती है।
तो य़े था आज का राइजिंग बिहार पेशकश.. अगले राइजिंग बिहार के खास रिपोर्ट में बिहार के किसी और ऐतिहासिक और पर्यटक स्थल की बात करेंगे तबतक आप देखते रहें टीडी न्यूज़ नमस्कार