20नवंबर से बदलकर 14नवंबर को बाल दिवस मनाने की सच्चाई देखिए

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14 नवंबर आज का दिन देश में बाल दिवस के रूप में मान्य जाता है। पूर्व प्रधानमंत्री श्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की जन्म तिथि बाल दिवस को और भी ख़ास बना देती है । पंडित जवाहर लाल नेहरू का इस देश के बच्चों के प्रति प्यार उनकी म्हणता में और चार चाँद लगाता है । नेहरू जी का मानना था की ये बच्चे जो आज हमारे गोद में और धरती मन के धूल में खेल रहें है यही आगे चल के एक बेहतर भविष्य का निर्माण करेंगे । नेहरू जी दूरदृष्टि के धनि ब्यक्तित्व थे इनकी आधुनिक सोच ने भारत के विकास को एक नै रफ़्तार दी थी उनके सोच में शामिल हौसले और युवापन ये अक्सर बताता था की वह देश के युवाओं पर कितना भरोसा और देश के बच्चों से कितना प्यार करते थे ।

बच्चोने के प्यार ने उन्हें जवहरलाल नेहरू से चाचा नेहरू बना दिया जो किसी nighthood की उपाधि से कही बढ़कर । नेहररु देश के हित में सोचने के साथ बच्चों पर विशेष ध्यान देते थे उन्होंने बच्चों के लिए स्वदेशी सिनेमा बनाने के लिए 1955 में चिल्ड्रन फिल्म सोसाइटी इंडिया की स्थापना की थी। भारत में बाल दिवस 1956 से ही मनाया जा रहा है भारत में बाल दिवस पहले हर साल 20 नवंबर को मनाया जाता है परन्तु सं 1964 में नेहरू के मृत्यु के बाद बच्चों के प्रति उनका प्यार देखते हुए उनके सम्मान में 14 नवंबर यानी उनके जन्म तिथि पर बाल द्विअस मनाया जाने लगा । बता दें कि बाल दिवस को 20 नवंबर से 14 नवंबर को मनाने के लिए भारतीय संसद में एक प्रस्ताव लाया गया था, उसके बाद उसे पारित कर तारीख बदली गई। हालाँकि भारत एक लौटा ऐसा देश नहीं है जहाँ बाल दिवस मनाया जाता है । दरसल दुनिया भर में 1 जून को बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है । भारत पंडित नेहरू के दिए संस्कार और योगदान को हमेशा याद रखेगा ।