शिवसेना की स्थापना में बाल ठाकरे के साथ दो-तीन लोगों की भूमिका थी। पेशे से आर्किटेक्ट माधव देशपांडे उसमें मुख्य थे

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जब शिव सेना का गठन हुआ तो उसे एक पार्टी का स्वरूप देने और उसे बनाने में केवल बाल ठाकरे की भूमिका नहीं थी बल्कि उसमें उनके अलावा तीन और लोगों की भी खास भूमिका थी। 90 के दशक में शिव सेना को वो सियासी ताकत हासिल हुई, जिसके लिए उसका 1966 में गठन किया गया था

शिवसेना की स्थापना में बाल ठाकरे के साथ दो-तीन लोगों की भूमिका थी। पेशे से आर्किटेक्ट माधव देशपांडे उसमें मुख्य थे क्षेत्रीय ताकत के तौर पर शिवसेना के निर्माण का विचार उन्हीं का था। देशपांडे के पार्टनर पदमाकर अधिकारी और श्याम देशमुख ने मरा‌ठी मजदूरों को शिवसेना से जोड़ने में बड‍़ा काम किया। साथ ही वसंत प्रधान जो कि रेलवे में काम करते थे, लेकिन बाद में वकालत करके मजदूरों का केस लड़ने लगे।

दरसल् 80 के दशक तक ऐसा लगने लगा कि बंबई पर शिव सेना और बाल ठाकरे का राज है। मुंबई की नगर पालिकाओं पर उनका कब्जा हो चुका था। बड़े उद्योगपतियों का विश्वास वो जीत चुके थे। बॉलीवुड भी ठाकरे के साथ खड़ा नजर आने लगा था। उन्होंने बंबई में साउथ के डायरेक्टर्स की फिल्मों की शूटिंग भी रुकवा दी। बंबई के कुछ डायरेक्टर और प्रोड्यूसर ठाकरे की इस अदा पर फ़िदा हो गए। बॉलीवुड के बड़े बड़े स्टार, निर्माता, निर्देशक उनके घर पर आकर हाजिरी बजाने लगे।

जैसे की सुजाता आनंदन की किताब ‘हिंदू हृदय सम्राट’ में पड़ताल की गई कि शिवसेना की स्थापना क्यों हुई। किताब कहती है, देशपांडे ने कांग्रेस पार्टी द्वारा मरा‌ठियों की अनदेखी के विरोध में हिंदुओं को एकजुट करने के उद्देश्य से शिवसेना बनाई थी. बाल ठाकरे को इसे पार्टी का दर्जा दिलाने में दस साल का समय लग गया। शिवसेना ने आपातकाल के समय में सरकारी कहर से बचने के लिए पार्टी के किसी कार्यकारी के नाम को कागजात पर दर्ज नहीं किया। ठाकरे ने गिरफतारी से बचने के लिए बिना किसी पद के पार्टी के संचालन का फैसला किया।