मिल गई रिहाई। राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की हुई घर वापसी।

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लालू प्रसाद को मिली जमानत पर कल उनको दिल्ली एम्स अस्पताल से रिहाई मिल गई। जिसके बाद वह अपनी बेटी मिसा भारती के यहां शिफ्ट हुए है।

 बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राजद के सुप्रीमो लालू प्रसाद को कल दिल्ली एम्स से छुट्टी मिल गई है । जिसके बाद वह अपनी बेटी मीसा भारती के यहां शिफ्ट हुए हैं। बता दें कि पिछले कई महीनों से लालू प्रसाद यादव की तबीयत नासाज थी जिसे देखते हुए उन्हें कारागाह से दिल्ली के एम्स अस्पताल में शिफ्ट किया गया था जहां उनकी इलाज चल रही थी । ज्ञात हो की चारा घोटाला , अवैध निकासी और धोखाधड़ी और कई  मामले में कोर्ट ने सजा सुनाई थी। परंतु तबीयत में आई गिरावट की वजह से लालू प्रसाद को बीते 17 अप्रैल को ही जमानत मिल गई थी परंतु कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच कोर्ट के कार्यवाही में दिक्कत आ रही थी जिसके वजह से लालू प्रसाद की रिहाई नहीं हो पा रही थी ।

परंतु कोर्ट के न्यायिक पैनल के फैसले के बाद उन्हें रिहाई भी मिल गई है । बता दें कि लालू प्रसाद की तबीयत पहले से ठीक है परंतु डॉक्टर ने कहा है कि वह अभी भी खास डॉक्टरों के निगरानी में रहेंगे । कोरोना के बढ़ते मामले और उनकी कमजोर सेहत का खयाल रखते हुऐ वह अपने बेटी मिशा भारती के यह शिफ्ट हो गए हैं जहा हर वक्त उन्हें डॉक्टर्स की निगरानी में रखा जाएगा ।

लालू प्रसाद के करीब 3 साल बाद वापस घर आने से उनके परिवार और उनके समर्थकों में काफी खुशी का माहौल है । बड़े बेटे तेजस्वी प्रसाद यादव ने भी पीता के घर वापसी पे खुशी जताई है । वहीं दूसरी तरफ राजद पार्टी के नेताओं के बीच भी खुशी का माहौल है ।

हालांकि लालू का चुनावी करियर खत्म हो चुका है परंतु उनके राजनीतिक स्किल आज भी उनके पार्टी के काम आते है ।यही कारण है कि लालू अपने समर्थकों में इतने प्रिय हैं की उनकी वापसी पर समर्थकों की खुशी साफ साफ दिखाई दे रही है ।

एक तरफ जहां बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राजद के सुप्रीमो लालू प्रसाद के घर वापसी की खुशी है वह बिहार के पूर्व सांसद और लालू प्रसाद कर बहुत ही करीबी नेता सिवान के शहाबुद्दीन की कोरोना की वजह से दिल्ली में मौत हो गई। उनकी मौत को लेकर लोगों में उदासी का माहौल है । 

मोहमद शहाबुद्दीन लगातार 14 साल तक सिवान से मेंबर ऑफ पार्लियामेंट रहे । फिर हत्या और कत्लेआम के कई मामलों में पटना हाई कोर्ट ने 30 अगस्त को मौत की सजा बरकरार रखी थी  । हालांकि दिल्ली पुलिस ने 2005 में ही शहाबुद्दीन को गिरफ्तार किया था और आरोप सिद्ध होने के बाद 2007 में उन्हें चुनावी मैदान से वंचित कर दिया गया । शहाबुद्दीन का खौफ इस क़दर था कि आज भी उनके पैतृक गांव सिवान में लोग शहाबुद्दीन के नाम से डर जाते है ।

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SUMIT SAHITYA ( COPY EDITOR )