सरकार कोरोना से बचने के लिए हर संभव कोशिश कर रही है । परंतु उनकी कोशिश कामयाब होते नहीं दिख रही । सिर्फ कागजों पर ही मरीजों को सुविधाएं प्रदान की जा रही है ।

आज पूरा देश कोरोना के भंवर में घूम रहा है ।  लोग अपनी जान गवां रहे हैं । ऐसे में सरकार ये दावा कर रही है की उनकी स्वास्थ्य व्यवस्था सुदृढ़ हो रही है । सरकार लगातार अपने  आंकड़े  पेश कर रही है और अपने द्वारा किए गए स्वास्थ्य व्यवस्था का ढिंढोरा पीट रही है । वो चाहे बात अस्पतालों में बेड की हो , कोरोना मरीजों के लिए ऑक्सीजन की व्यवस्था की है सिलेंडर की  हो रेमडेसिवीर इंजेक्शन की हो या अन्य दवाओं की  हो सरकार हर जगह यह दावा कर रही है की मरीजों को सारी सुविधा मुहैया करा रही है । पर क्या सच में मरीजों को सारी सुविधाएं मिल रही हैं । सरकार जो दावे कर रही है उसमे कितनी सच्चाई है ये तब पता चलता है जब अस्पतालों में बिलखते परिजन मदद की गुहार लगाते नजर आते हैं । बेड के अभाव में मरीज जमीन पर सोने पर मजबूर हैं । ऑक्सीजन के वजह से बीना सांस छटपटाते हुए दिखते हैं ।

सरकार के आंकड़ों को देखें तो हर राज्य को उनके मांग के अनुसार ऑक्सीजन की पूर्ति की जा रही है । ऑक्सीजन की कमी न हो इसके लिए विदेशों से भी ऑक्सीजन और अन्य जरूरी सामान की आयात हो रही है । 

हाल में ही अमेरिकी प्रेसिडेंट जो बाइडेन ने भारत को ऑक्सीजन निर्माण के लिए कच्चे माल को देने का वादा किया है । इसके अलावा रैपिड diagnosis कीट , तथा PPE किट देने की बात कही है ।इसके बाद UK ने भारत को कोरोना से लड़ने के लिए 600 आवश्यक मेडिकल इक्विपमेंट , 495 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर,120 नॉन इनवेसिव वेंटिलेटर और  20 मैनुअल वेंटिलेटर देने की बात कही ।वहीं  सिंगापुर ने भी  4 सिरोजेनिक ऑक्सीजन टैंक की मदद की है जिसे

इंडियन एयरफोर्स ने आज भारत में आयात किया है।

 भारत में ऑक्सीजन की कमी देखते हुए सऊदी अरबिया ने 80 मीट्रिक टन ऑक्सीजन भारत को भेजा है ।

और भी कई देशों ने कोरोना के इस जंग में भारत का साथ देने का वादा किया है । जिसे इंडियन एयरफोर्स हवाई मार्ग से लोगों तक पहुंचाने की कोशिश कर रही है । अब तक इंडियन एयरफोर्स ने दो टैंकर का आयात कर लिया है ।

तो फिर सवाल ये उठता है की भारत ख़ुद ऑक्सीजन की उत्पादन मांग की क्षमता से करता है , और फिर मित्र राष्ट्रों द्वारा भी लगातार मदद की जा रही है तब भी देश की हालत ऐसी क्यों है । ?  भारत के स्वास्थ्य व्यवस्था की कहानी लोगों के आंसुओं में साफ साफ दिख रही है । लोगों की चीखें उनके राज खोल रहे हैं ।

भारत जैसे विशाल आबादी वाले शहर में व्यवस्थाओं की इस लचरता देखकर इसके भविष्य की कल्पना की जा सकती है जो की काफी भयावह है । ऐसी स्थिति में हम सरकार से यह विनती करते हैं की जल्द से जल्द लोगों तक जरुरी सामान पहुचाई जाए  ताकि कोई संतान अपने मां बाप से ना बिछड़े ,  कोई भाई अपनी बहन से ना बिछड़े।  संकट के इस घड़ी में उम्मीद का दामन न छोड़े। वक्त का बदलना तय है। 

SUMIT SAHITYA (copy editor)