तीसरी लहर में कोरोना से मरने वालों में ६० प्रतिशत लोग पूरी तरह वैक्सीनेटेड नहीं

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कोरोना से बचने के लिए वैक्सीन एक बेहतर उपाय है। स्वस्थ्य मंत्रालय का यह कथन आपको अवस्य याद होगा और आपने यकीं भी किया होगा। मगर वैक्सीन के बाद भी तीसरी लहार का यूँ हावी होना वैक्सीन के प्रभाव पर सावल खड़ा करता है। आप बेशक स्वस्थ्य मंत्रालय के वादों कथनो को खोखला और बेबुनियाद समझ रहें होंगे। और आपकी यह समझ और सवाल दोनों बिलकुल जायज है। कोरोना के तीसरी लहार जिस तरह रफ़्तार पकड़ रही है उसे देख कर यह प्रतीत हो रहा है की वैक्सीन कोरोना के सामने फीकी पड़ रही है। परन्तु सही मायने में देखा जाए तो तीसरी लहर के बढ़ते प्रभाव बहुत देर तक नहीं रह रहे हैं।

इस लहर में संक्रमित ब्यक्ति अगर वैक्सीन की दोनों खुराख ले चूका है तो उसपर कोरोना न के बराबर प्रभावी रह रहा है। वही सिंगल खुराख ले चुके ब्यक्ति इस लहर में कोरोना के चंगुल से जल्द ही छूट जा रहें हैं। अगर बात हम मौत की करे तो हाल में ही स्टडी की हुई आंकड़े बताते हैं की इस लहर में जितने लोगों की मृत्यु हो रही है उसमे प्रतिशत वैसे लोग हैं जिन्होंने वैक्सीन की या तो पहली खुराख लिया हैं या वैक्सीन की कोई खुराख अब तक नहीं लिया। यह स्टडी प्राइवेट हॉस्पिटल एम्स ने किया है। तो देखा जाए तो वैक्सीन कोरोना को हारने में नाकाम है पर उससे बच निकलने में काफी कारगर शाबित हो रहा है। देश भर में अब तक 1.5 अरब से भी ज्यादा लोगों को काम से काम वैक्सीन की पहली खुराख दे दी जा चुकी है ऐसे में कोरोना की यह तीसरी लहर कम प्रभावी रहेगी ऐसा अवलोकन किया जा रहा है। केवल पहले खुराख ले चुके लोगों की संख्या 92.9 करोड़ है जबकि दोनों डोज ले चुके लोगों की संख्या 62.28 करोड़ है। वही कोरोना के आंकड़े को देखे तो पिछले 24 घंटे में कोरोना के कुल संक्रमितत मरीजों की संख्या 3.34 लाख है जबकि इस दौरान 525 लोगों की मौत हो गई है। देश में कोरोना का इस तरह बेकाबू होना निश्चित ही चिंता का विषय है। बहरहाल आज के हलचल में इतना ही देखते….