वैक्सीनेशन के बाद भी कोरोना क़ा कहर, सारे आंकड़ों को ध्वस्त करता ओमीक्रोन

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कोरोना यह एक शब्द जो पिछले दो सालों से हमने अनगिनत दफा सुने होंगे। फिर भी इस शब्द को सुनते ही एक दर का माहौल इस तरह खड़ा जो जाता है। देश भर में कोरोना एक बार फिर पैर पसारने लगा है। कोरोना के इस तीसरी लहर की रफ़्तार पिछले दो लहरों से भी तेज मानी जा रही है ,पुरे देश में एक बार फिर डर,और आतंक का माहौल बनते जा रहें हैं। आकड़ों पर आँख टिकाये तो पिछले 24 घंटों में 1,41,986 नए केस सामने आएं है जबकि मौत का नंबर 285 रहा है। देश एक बार फिर पिछले साल के मई वाले आकड़े पर लौट रहा है। वही एएनआई ने कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रोण के आंकड़े को भी सामने रखा है। स्वास्थय मंत्रालय के अनुसार देश में अब तक ओमिक्रोण के एक्टिव मामले 3071 है जबकि 1203 लोग अब तक ठीक हो चुके है। अगर बात वैक्सीनेशन की करे तो देश भर में लगभग 150 कड़ोर लोगो को वैक्सीन दिए जा चुके हैं। आंकड़े बता रहें हैं की देश के लगभग पूरी जनता को कम से कम प्रथम डोज़ दिए जा चुके हैं ,लेकिन कोरोना के तीसरी लहर के रफ़्तार को देख कर ऐसा लग रहा है की कोरोना के आगे वैक्सीन जैसे रेत की बनी दीवाल साबित हो रही है। देश के लगभग जनता को प्रथम डोज़ वैक्सीन देने के बाद भी कोरोना उनपे हावी हो जा रहा है।

देश के कई अस्पताल के सैकड़ों डॉक्टर जिन्होंने वैक्सीन के दोनों डोज़ ले लिए थे ,कोरोना के इस तीसरी लहर ने उन्हें भी बीएड पर ला कर पटक दिया है। दोनों लहरों के मुकाबले तीसरे लहर में ज्यादा डॉक्टर्स करोना के चपेट में आ रहें है। तो सवाल अब यह उठता है की आखिर वैक्सीन उतनी ज्यादा प्रभावी क्यों नहीं शाबित हो रही की कोरोना से लड़ सके?क्या वैक्सीन किसी काम का नहीं है। स्वास्थय मंत्रालय के दावे पर गौर किया जाए तो स्वास्थय मंत्रालय ने यह कहा थी की कोरोना से बचने का उपाय वैक्सीनेशन है। मगर बढ़ते मामले बता रहें है की कोरोना इन दावों पर बैठे मुस्कुरा रहा है। कोरोना के लगातार तीसरी अटैक यह साबित कर रहा है की वैक्सीन के नाम पर जनता के साथ कुछ तो मजाक हुआ है। अगर पिछले महामारियों की बात करें तो उनके टीकाकरण के बाद किसी इंसान के उस रोग से ग्रसित होने की सम्भावनाये 10 प्रतिशत से भी कम होती है। मगर कोरोना के केस में इस आकड़े को सही मानना बेवकूफी कहा जा सकता है। अगर बात करे ओमिक्रोण की तो उसकी एक्टिव संख्या केवल 3071 है तो यह भी कहना गलत होगा की वैक्सीन का लोगों पर कम प्रभाव इस नए वेरिएंट के वजह से है। कई एजेंसीज ने यह दावा किया है की कोरोना के नाम पर लोगों में डर और आतंक को फैलाया जा रहा है ताकि अपनी जेबे भर सके। वैक्सीन के नाम पर पहले भी सवाल खड़ा किया था और अब एक बार फीर वैक्सीन की प्रमाणिकता लोगों के सवालों के कटघरे में है। हालाँकि स्वस्थ्य मंत्रालय इस बात का दवा कर रही है कोरोना की तीसरी लहर उतनी प्रभावी नहीं है। यह बहुत जल्द ही ठीक हो जा रहा है। बहरहाल स्वास्थय मंत्रालय के दावे भी लोगों के अंदर विश्वाश दिलाने में कामयाब होती हुई नहीं दिखाई दे रही है।