मध्यप्रदेश के 1000 स्कूलों का निजीकरण तय , शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ने के आसार

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देश में निजीकरण का दौर चल रहा है । मोदी सरकार ने कई सरकारी क्षेत्रों को निजीकरण में बदल दिया है । हालाँकि इन निजीकरण के पीछे का उद्देश्य सरकारी संस्थाओं को और बेहतर बनाना है , फिर भी देश में निजीकरण के खिलाफ कई आवाजे बुलंद होते आ रही है । रेलवे ,और एयरपोर्ट के निजीकरण के बाद सरकार ने कुछ अन्य क्षेत्रों को और बेहतर बनाने के उद्देश्य से प्राइवेट करने का फैसला ले रही है जिसमे सरकारी स्कूलें भी शामिल हैं । गौरतलब है की भारत के कुछ हिस्सों में जिस तरह की स्थिति सरकारी स्कूलों की है उसे देखते हुए सर्कार इसे प्राइवेट करने के फैसले पर विचार कर रही थी । जिसके क्रम में मध्यप्रदेश के 1000 सरकारी और हायर सेकेंडरी स्कूलों को प्राइवेट करने की कवायत चल रही है ।

स्कुल शिक्षा विभाग के अडिशनल डायरेक्टर डीएस कुशवाह ने बताया की सरकारी स्कूलों के गुणवत्ता बढ़ाने के लिए जो भारतीय सरकार के शिक्षा विभाग ने जैसे तय किया है उसी हिसाब से काम होगा । लेकिन सेवायें बेहतर हो इसके लिए पढ़ाने वाले सर्वश्रेष्ठ शिक्षकों की भर्ती की जायेगी साथ ही उन्हें रिफ्रेशर की ट्रेनिंग देनी शुरू भी कर दी गई है । इस योजना के तहत हर स्कूल में कम से कम दो स्मार्ट क्लास होंगे जिससे बच्चों को पढ़ने में मदद मिलेगी । इसके साथ ही स्कूलों में खाली पदों को भी भरने की तैयारी चल रही है । अधिकारियों का कहना है की शिक्षा के गुणवत्ता में सुधार की दिशा में शुरूआती कदम उठाये जा चुके है ,इसके तहत प्रदेश में अब तक लगभग 700 शिक्षक और प्रधानाध्यापकों की ट्रेनिंग हो चुकी है । सरकार जिस तह से ढाँचे दिखा रही है स्कूलों के निजीकरण से उस हिसाब से देखा जाए तो यह एक बेहतर कदम होगा शिक्षा को बढ़ाने के क्रम में ।