नहीं रहें बप्पी दा ,69 की उम्र में दुनिया को कह अलविदा। उनके आज भी इन गानों पर झूमते हैं लोग।

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80 और 90 के दसक मशहूर गायक,एक्टर और संगीतकार बप्पी लाहड़ी की आज मुंबई के क्रिटिकेयर अस्पताल में निधन हो गया। उनकी मृत्यु 69 वर्ष की उम्र में हो गई थी। बप्पी लहरी की तबियत पिछले एक महीने से ख़राब थी। इस लिए उन्हें पिछले एक महीने से मुंबई के क्रिटिकेयर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। लगतार चल रहे इलाज से हैलत में कुस्ठ सुधर देखने को मिली तो डॉक्टर्स ने उन्हें डिस्चार्ज कर दिया। मगर मंगलवार को फिर से उनकी हालत बिगड़ने पर अस्पताल ले जाया गया जिसके बाद उनकी मृत्यु हो गई।

BAPPI LAHRI (file photo)

प्रधानमंत्री ने जताया दुःख।

उनके निधन पर प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के साथ कई और हस्तियों ने ट्वीट कर अपना दुःख जताया है। प्रधान मंत्री मोदी ने लिखा की “श्री बप्पी लाहिड़ी जी का संगीत सर्वांगीण था, विविध भावनाओं को खूबसूरती से व्यक्त करता था। पीढ़ियों के लोग उनके कार्यों से संबंधित हो सकते हैं। उनका जीवंत स्वभाव सभी को याद होगा। उनके निधन से दुखी हूं। उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति संवेदना। शांति।”

गृह मंत्री अमित शाह ने बप्पी दा के राज्य भाषा बांग्ला में लिखा की “महान गायक और संगीतकार बापी लाहिड़ी जी के निधन की खबर से दुखी हूं। उनके निधन से भारतीय संगीत जगत में एक बहुत बड़ा शून्य पैदा हो गया है। बापी दा को उनकी बहुमुखी गायन प्रतिभा और जीवंत स्वभाव के लिए हमेशा याद किया जाएगा। उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति मेरी संवेदनाएं। शांति।” बप्पी दा के निधन से सारा देश दुखी है। वे एक सहज स्वाभाव और प्रतिभा के धनि ब्यक्ति थे आइये उनके बारे में कुछ और बाते जानते हैं।

अलोकेष लहरी से बने बप्‍पी लहरी।

बप्पी लाहड़ी का मूल नाम अलोकेष लाहड़ी था लेकिन एंटरटेनमेंट जगत में वह बप्पी दा के नाम से लोगों के दिलों पर राज करते थे। 80 और 90 के दशकों में अपनी गांव पर सबको झुमाने वाले बप्पी लाहड़ी का जन्म 27 नवंबर 1952 में असं के जलपाईगुड़ी में एक बंगाली संगीतकार के परिवार में हुआ था। उनके माता-पिता, अपरेश लाहिरी और बंसुरी लाहिरी, दोनों शास्त्रीय संगीत और श्यामा संगीत में बंगाली गायक और संगीतकार थे। अपने माता पिता से मिली यह विधा ने उन्हें सफलता की उन बुलंदियों तक पहुँचाया जिसकी कल्पना उन्होंने भी शायद नहीं की होगी।

महज तीन साल में हांसिल की तबला में महारत।

वह संगीत को लेकर किस तरह से प्रभावित थे इसका अंदाजा इस बात सेलगाया जा सकता है की उन्होंने महज 3 साल की उम्र में तबला बाजना सिख लिया था। बप्पी लाहिरी 1970 के दसक के अंतिम में प्रशिद्ध होना सुरु हुए उन्होंने 80 और 90 के दशक के दौरान कई फिल्मों में म्यूजिक कंपोज़ किया। उनकी कुछ बहुचर्चित फिल्म आंगन की कली, वर्दत, डिस्को डांसर, हथकड़ी, नमक हलाल, मास्टरजी, डांस डांस, हिम्मतवाला, जस्टिस चौधरी और शराबी जैसी फिल्मों से उनके द्वारा रचित फिल्म साउंडट्रैक के लिए लोकप्रिय थे। इसके अलाव कुछ एक्शन जैसे तोहफा, मकसाद, कमांडो, गैंग लीडर, सैलाब जैसे फिल्मो में अपना योगदान दिया। इसके अलावे उन्होंने उन्होंने 1985 की फिल्म ऐतबार के लिए कुछ ग़ज़लों के लिए संगीत भी तैयार किया, जिसका नाम “किसी नज़र को तेरा इंतजार आज भी है” और “आवाज़ दी है” है।

80 और 90 के दशक में हुए मशहूर।

उन्होंने 80 के दशक में नया कदम, मास्टरजी, आज का विधायक राम अवतार, बेवफाई, मकसाद, सुरग, इंसाफ मैं जैसी हिट फिल्मों में राजेश खन्ना अभिनीत फिल्मों में आशा भोसले या लता मंगेशकर के साथ युगल गीत के रूप में किशोर कुमार द्वारा गाए गए मधुर गीतों की रचना की। बप्पी दा ने अपनी आवाज अपने संगीत से इतने फिल्मो को सवांरा है की अगर हम जिक्र करने बैठे तो कई घंटे यूँ ही गुजर जाएंगे। बप्पी महज 19 साल की उम्र में ही मुंबई जिसे सपनो का शहर कहा गया है ,में आ गए थे। हिंदी फिल्मो में आने से पहले बप्पी लाहड़ी ने कुछ बंगाली फिल्मो के संगीतों को बनाया जैसे उनकी पहली फिल्म दादू(1974) जो की एक बंगाली फिल्म थी जिसमे उन्होंने लता मंगेशकर को अपनी रचना गवाई। उन्होंने नन्हा शिकारी (1973) से हिंदी फिल्म जगत में अपना कदम रखा और एक के बाद एक हिट फिल्मो में अपने हिट गांव से लोगों के दिलों में अपने लिए इज़्ज़त और प्यार को स्थापित किया। उनका गाने आज भी लोगों के लिए नए ही हैं। वे आज भी उन गांव को वैसे ही सुनते हैं जैसे उस वक़्त सुना करते थे।

राजनीती में भी खेली दावं पेंच।

बप्पी दा ने राजन्ती में भी अपना हाथ आजमाया था। वह 31 जनवरी 2014 को भारतीय जनता पार्टी के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह की उपस्थिति में 2014 का लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए। उन्हें 2014 में श्रीरामपुर (लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र) से भाजपा का उम्मीदवार बनाया गया था, लेकिन अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस के कल्याण बनर्जी से हार गए। पर भी वह लोगों के दिलों में बने रहें। बप्पी दा ने फिल्मअफारेअवार्ड्स में भी बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर की उपाधि प्राप्त की।

आना जाना लगा रहेगा सुख आएगा दुःख जाएगा

उनके निधन पर उनका ही एक गाना …”आना जाना लगा रहेगा सुख आएगा दुःख जाएगा” यह याद दिलाता है की सबको एक दिन इस दुनिया को अलविदा कहना होगा। देश ने एक सप्ताह के भीतर दो अमूल्य रत्नो को खो दिया है। पहले लता मंगेशकर और अब बप्पी दा इन दोनों के जाने से संगीत के एक दुनिया का अंत हो गया पर उनके गाये गाने सदैव लोगों के जहाँ में रहेंगे।