राजनीति से सन्यास ले सकते हैं पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी

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बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी अब राजनीती से संन्यास लेने के तैयारी में हैं । दरसल मांझी ने बुधवार को मीडिया से बात करने के दौरान यह बताया की २३ मार्च को जो घटना विधानसभा में हुई वह निश्चित रूप से निंदनीय था । इस घटना ने उन्हें काफी आहत किया है । उन्होंने कर्पूरी ठाकुर का जिक्र करते हुए कहा की सदन के अपने 36 वर्ष के अनुभव के आधार पर हम कहते हैं कि जिस दौर में कर्पूरी ठाकुरजी नेता प्रतिपक्ष थे, तब भी किसी मुद्दे पर विरोध के वक्त तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष के निर्देश पर मार्शलों ने ही विरोध करने वाले विपक्षी सदस्यों को सदन से बाहर निकाल दिया लेकिन पुलिस की जरूरत नहीं पड़ी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा की यह संभवतः सदन में मेरा आखरी कार्यकाल है । इधर विधान सभा में माल और सेवाकर संशोधन विधेयक बुधवार को पारित कर दिया गया। इससे जहां कारोबारियों को सुविधा मिलेगी, वहीं फर्जी बिल बनाकर आईटीसी (इनपुट टैक्स क्रेडिट) चोरी करने पर अब लगाम लग सकेगी।

अब यह होगा कैसे आइये हम आपको बताते हैं दरसल माल की खरीद वाली कंपनी के आईटीसी की राशि जमा नहीं करने तक उनसे खरीद करने वाले कारोबारियों को आईटीसी का लाभ नहीं मिलेगा। कारोबारियों को राहत देने को आयकर ऑडिट को ही जीएसटी में मान्य कर दिया गया है। अब उन्हें जीएसटी वार्षिक रिटर्न दाखिल करने के लिए चार्टर्ड एकाउंटेंट से अलग ऑडिट नहीं कराना होगा। जिससे खरीदने और बेचने वाले दोनों का लाभ होगा । इस विधेयक को उपमुख्यमंत्री सह वाणिज्य कर मंत्री तारकिशोर प्रसाद ने पारित करवाया है । उपमुख्यमंत्री सह वाणिज्य कर मंत्री ने इस विधेयक को विधानसभा में रखते हुए कहा कि कारोबारियों के हित और टैक्स चोरी रोकने के लिए जीएसटी में संशोधन किया गया है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार ने जीएसटी के तहत पंजीकृत कारोबारियों की मांग पर जीएसटी कानून में संशोधन किया है। अब किसी कारण से टैक्स जमा करने में देरी होने पर उन्हें असल (आईटीसी घटाने के बाद बची ) कर राशि पर ही ब्याज देना पड़ेगा।
फिलहाल आज के ब्रेकिंग में इतना ही देखते रहें टीडी न्यूज़