बिहार में 10 दिनों में दो धमाके,आतंकी कनेक्शन का होगा भांडाफोड़

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जून में महज 10 दिनों के अंतराल पर राज्‍य में हुए दो विस्फोट ने पुलिस-प्रशासन को फिर से अलर्ट कर दिया है। सबसे पहले आठ जून को बांका के नवटोलिया स्थित मदरसे में विस्फोट हुआ जिसमें इमारत ढहने के साथ इमाम की मौत हो गई थी। वहीं 17 जून को दरभंगा जंक्शन पर सिकंदराबाद एक्सप्रेस से उतारे जा रहे कपड़े के पार्सल में धमाका हुआ। यह दोनों ही घटनाएं देखने में छोटी हों मगर पुलिस मुख्यालय इसकी गंभीरता से जांच में जुटा है। बिहार में दस दिनों में हुए दो धमाकों ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। पहले बांका फिर दरभंगा में हुए विस्‍फोट का आतंकी कनेक्‍शन देखा जा रहा है। इस मामले में तेलंगाना एटीएस की भी ली जाएगी मदद।


पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आतंकी कनेक्शन के शक में बिहार का आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) जांच में जुटा है। इस मामले में तेलंगाना एटीएस की भी मदद जाएगी। सिकंदराबाद से पार्सल आने के बाद पुलिस ने तेलंगाना एटीएस से भी सहयोग के लिए संपर्क किया है। इधर, बिहार एटीएस ने शनिवार को भी घटनास्थल का मुआयना किया और स्थानीय पुलिस अफसरों से केस से जुड़ी जानकारी ली। 
दरभंगा जंक्शन पर हुए विस्फोट की जांच के लिए बिहार पुलिस की एक टीम सिकंदराबाद गई है। टीम उस पते की तलाश करने गई है, जहां से दरभंगा के लिए पार्सल की बुकिंग हुई थी। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि सिकंदराबाद से इस पते पर इससे पहले और कितने पार्सल भेजे गए हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अगर इसका कोई आतंकी कनेक्शन नहीं भी है, तो यह जानना जरूरी है कि कपड़ों के बीच में छिपाकर क्यों विस्फोटक सामग्री दरभंगा लाई जा रही थी। 
बांका ब्लास्ट मामले में पुलिस-प्रशासन ने प्रथम दृष्टया आंतकी कनेक्शन से इन्कार करते हुए इसे देसी बम ब्लास्ट बताया है। हालांकि एफएसएल और एटीएस की टीम ने विस्फोटक के सैंपल लिए हैं। इसी तरह दरभंगा विस्फोट में भी शीशी के अंदर किसी केमिकल के कारण विस्फोट की बात सामने आ रही है। यहां भी सैंपल लिया गया है। एटीएस के अधिकारियों के अनुसार, विस्फोट के लिए इस्तेमाल किए गए केमिकल काफी हद तक जांच की दिशा तय करेंगे ..आपको बता दें कि बिहार पहले भी आंतकियों के निशाने पर रहा है। खासकर 2013 में महज चार माह के अंतराल पर पहले बोगधया और फिर पटना के गांधी मैदान में सीरियल ब्लास्ट हुए थे। इन दोनों ही घटनाओं को राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (एनआइए) की जांच में आतंकी हमला माना गया था। बोधगया सीरियल बम ब्लास्ट मामले में एनआइए कोर्ट ने पांच आरोपितों को उम्र कैद की सजा सुनाई थी। वहीं पटना बम ब्लास्ट मामले में 10 आरोपित पकड़े गए हैं, जिनकी सुनवाई जारी है।..अब देखना यह होगा कि इस ब्लास्ट से जुड़े  आरोपियो पर क्या कार्यवाई होती है़ और इस ब्लास्ट कनेक्शन में क्या खुलासा होता है़ ।

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