इस दीपावली आप भी करें मन के अँधेरे को दूर ,हौसले और उम्मीद की रौशनी के साथ।

0
98

अनंत काल से यह परंपरा चली आ रही है की सच्चाई ने हमेशा से बुराई पर जित पाया है । फर्क नहीं परता की बुराई अच्छाई पर कितनी हावी रही है अंत में जित अच्छाई की ही होती आ रही है । हमारे वेद , ग्रन्थ , महाकव्य इस बात के साक्षी है की जब भी अँधेरा घना हुआ है दिए की एक रौशनी ने अपने प्रकाश से उस अँधेरे को दूर किया है।

दीपावली उसी जित की एक गाथा है । जी हाँ आज दीपावली है ,रौशनी का त्यौहार वह रौशनी जो हर किसी के जीवन के अँधेरे को दूर करती है ,वह रौशनी जो रास्ता दिखाती है वह रौशनी जो हमारा आज और कल रौशन करती है । सौंधी सौंधी मिटटी के दिए में घी की महक और उसमे जलती हुईं बत्तियाँ हमें यह याद दिलाती हैं की अगर हौसले की मिटटी और उम्मीद की घी हो तो जल के भी दुनिया को रौशन किया जा सकता है । वह जलता हुआ दीपक हमें उस वीरऔर मर्यादापुरुषोत्तम भगवान् राम की याद दिलाती है जिन्होंने अनंत कठिनाई और पीड़ा के वावजूद रावण जैसे बलि को हरा कर यह शाबित किया की रास्ते चाहे कितनी भी कठिन हो मंजिल सच्चाई की राह पर चलने वाले को ही मिलती है । यह त्यौहार हमें उन राजकुमारों की याद दिलाती है जो वर्षों बाद अपने घर लौटे थे ।

हम सब जानते है की दीपावली मर्यदापुर्षोत्तम राम उनकी पत्नी सीता और छोटे भाई लक्ष्मण के घर वापसी के उपलक्ष में मनाई जाती है । वेदों के अनुसार जब भगवान् राम रावण का वध करके अपनी पत्नी और अनुज के साथ 14 वर्ष के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे तब अयोध्या वासियों ने उनके स्वागत में अपने घरों पर घी के दिए जलाये थे । वेद के अनुसार उस दिन और उसके अगले कई दिनों तक पूरी अयोध्या दिए की रौशनी में जगमगा रही थी । तब से हम भारतवासी इसे दीपावली का रूप दे के हर साल उनके वापसी का जश्न मानते हैं । दीपावली के दिन माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश की भी पूजा की जाती है हालाँकि इसके पीछे भी कई कहानी है परन्तु कहा जाता है की कहा जाता है कि दिवाली को लक्ष्मी पूजा का कारण समुद्र मंथन है, दरअसल, जब देवताओं और असुरों के बीच समुद्र मंथन हुआ था तो इसमें से लक्ष्मी भी निकली थी. ये मान्यता है कि जिस दिन लक्ष्मी निकली थी, उस दिन कार्तिक कृष्ण पक्ष की अमावस्या थी. यह दिन ही दिवाली के तौर पर मनाया जाता है।

हालाँकि सच्चाई क्या है इस्पे मुहर लगाना आसान नहीं । कई लोगों का यह भी कहना है की भारतीय कालगणना के अनुसार 14 मनुओं का समय बीतने और प्रलय होने के पश्चात् पुनर्निर्माण व नई सृष्टि का आरंभ दीपावली के दिन ही हुआ था। जबकि साइंस के अनुसार दीपावली कार्तिक मास की पहली अमावस्या को मनाया जाता है जो बहुत ही अँधेरा रहता है और इस अँधेरे को दूर करने के लिए दिए जलाये जाते हैं । बहरहाल अलग अलग इतिहासकारो और धार्मिक गरुओं की अलग अलग मान्यातें हैं परन्तु जो इस त्यौहार का निष्कर्ष है वह बिलकुल साफ़ है की सचाई की बुराई और अँधेरे पर रौशनी की जित हमेशा से होती आ रही है । इस दीपावली आप भी अपने मन के अँधेरे को उम्मीद और हौसले की रौशनी से ख़तम करे और याद रखें की अँधेरा चाहे कितना भी घना क्यों न हो उसे ख़तम करने के लिए दिए की हलकी रौशनी ही काफी है । टीडी न्यूज़ के परिवार के तरफ से आप सभी को दीपावली की आनंदित बधाई । उम्मीद है इस दीपावली आपकी जिंदगी खुशियों से रौशन हो ।