क्या देश में सच में है लिक्विड मेडीकल ऑक्सीजन की कमी

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देश में ऑक्सीजन की कमी के कारण कई कोरोना मरीजों की जाने जा चुकी है । पर आंकड़े बताते है की ऑक्सीजन की कमी तो है ही नही , फिर ये मौतें कैसे ?

आज पूरा देश कोरोना के कहर से परेशान है । हालात इतने बिगड़ गए हैं कि लोगों को अपनी जान बचा पाना मुश्किल है।  ऐसे में ऑक्सीजन कि कमी लोगों में और भी भयावह स्थिति प्रदान कर रही है । बीते कुछ रोज में कईयों ने  ऑक्सीजन न मिलने के कारण दम तोड़ दिया है ।  देश के कई राज्यों से ऑक्सीजन की कमी होने की ख़बर आ रही है।  राज्यों की सरकार , केंद्र से लगातार ऑक्सीजन सप्लाई की मांग कर रहीं हैं। 

 केन्द्र सरकार भी इस मांग को मद्देनजर उद्योगों को ऑक्सीजन के सप्लाई पर रोक लगा दी है । ऑक्सीजन की कमी को देखते हुए  IFFCO(Indian Farmers Fertiliser Cooperative Limited) ने मुफ़्त ऑक्सीजन सप्लाई के लिए प्लांट लगा  रही है ।

देश की बड़ी बड़ी कंपनियां जैसे  रिलायंस , टाटा , जिंदल ने ऑक्सिजन का सप्लाई करना शुरू कर दिया है । 

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पर सवाल ये है की क्या देश में वाकई ऑक्सीजन की कमी है । क्या वाकई देश में मेडिकल ऑक्सीजन की उत्पादन क्षमता कम है । उतर है नहीं ।

आंकड़ों की माने तो देश में LMO यानी लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन की प्रतिदिन उत्पादक क्षमता 7287 मीट्रिक टन है और प्रतिदिन खपत केवल 3842 मीट्रिक टन है । कोरोना से पहले प्रतिदिन लगभग 700 मीट्रिक टन LMO की खपत हुआ करती थी जो पिछले साल बढ़ के 2800 मीट्रिक टन हो गई थी । और आज जब कोरोना अपने बिकराल रुप में है तो प्रतिदिन LMO की मांग बढ़ के 5000 मीट्रिक टन हो गई है। अब अगर हम आंकड़ों को देखें तो 5000 मीट्रिक टन LMO सप्लाई के बाद भी हमारे पास प्रतिदिन 2287 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की बचत होती है । ऊपर से केन्द्र सरकार ने विदेशों से भी ऑक्सीजन आयात करने की बात कही है ।

तो जब देश में ऑक्सीजन भरपूर मात्रा में है तो लोगों की जानें ऑक्सीजन की वजह से क्यूं जा रही है ।

 तो  बात दरअसल ये है की देश में ऑक्सीजन की मात्रा तो भरपूर है पर उसे वक्त पे ट्रांसपोर्ट कर पाना मुश्किल हो रही है । हालांकि केंद्र सरकार रेलवे और वायु मार्ग से देश भर में ऑक्सीजन का निर्यात कर रही है , पर फिर भी कोरोना के मामले इतनी तेजी से बढ रहें है की वक्त पे मरीजों को ऑक्सीजन नहीं मिल पा रही है । राज्यों में जितनी ऑक्सीजन की डिमांड है उससे कम पहुंच पा रहे है । प्रत्येक राज्यों  में ऑक्सीजन की औसतन डिमांड 800 मीट्रिक टन है ।जिन राज्यों में ट्रांसपोर्ट आसानी से की जा सकती हैं वहां ऑक्सीजन की सप्लाई डिमांड से ज्यादा भी रही है ।

अब देखना है की केंद्र सरकार और राज्य सरकार , लोगों को कैसे इस दुविधा से बाहर निकलती है ।

Editor – Sumit Sahitya