आखिर कौन है ये मुल्ला याकूब जिसे तालिबान ने बनाया अफगानिस्तान का रक्षा मंत्री

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अफगानिस्तान पर कब्जे के बाद तालिबान अपनी सरकार बनाने की कवायत में जुटा हुआ है । तालिबान अब अफगानिस्तान में अपने मंत्री परिषद् का विस्तार कर रहा है जिसके क्रम में तालिबान ने मुल्ला याकूब को अफगानिस्तान का रक्षा मंत्री बनाया है । ये नाम से शायद आप वाकिफ हों और अगर नहीं जानते हैं तो आइये हम बताते है की आखिर किसके हाथ में सौपा गया है अफगानिस्तान की रक्षा की जिम्मेदारी । तो दरअसल यह मुल्ला याकूब तालिबान के संस्थापक मुल्ला उमर का बीटा है । जी हाँ वही मुल्ला उमर जिसने तालिबान जैसी फ़ौज खड़ा कर दी जो आज अफगानिस्तान पर हुकूमत कर रहा है । वही मास्टरमाइंड जिसके इसारे पर इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट IC-814 24 दिसंबर 1999 को पाकिस्तानी आतंकवादियों ने हाईजैक कर लिया था ।नेपाल के काठमांडू से उड़े इस प्लेन में 176 यात्री मौजूद थे जिन्हे पुरे 7 दिन तक हाईजैक कर के अफगानिस्तान के कंधार में रखा गया था ,जहाँ पर तालिबान की हुकूमत थी . । इस विमान को हाईजैक करने के पीछे का मकसद जैश-ए-मोहम्मद के सरगना आतंकी मसूद अजहर, अल उमर मुजाहिदीन का नेता मुश्ताक अहमद जरगर और अलकायदा नेता अहमद उमर सईद शेख की रिहाई थी, जिन्हे उस समय भारतीय जेल में बंद रखा गया था ।

विमान जब कंधार पहुंचा तब वहाँ तालिबान ने बिमान पर कब्ज़ा कर लिया था । खबर यह भी आई थी की इन सब के पीछे पाकिस्तान के ख़ुफ़िया एजेंसी isi का भी हाथ था । ऐसे खतरनाक आतंकवादियों के हाथ में अब अफगानिस्तान का विकास है । गौरतलब है की तालिबान जिस तरह से अपने मंत्रालय का गठन कर रहा है वह निश्चित ही नेक इरादे से तो नहीं है । तालिबान ने पहले ही खूंखार आतंकवादी सिराजुद्दीन हक्कानी को अपना आंतरिक गृह मंत्री बना लिया है जिस पर कभी अमेरिका ने 5 मिलियन डॉलर का इनाम रखा था । इसके अलावे मुल्ला मुहम्मद हसन अखुंद को अफगानिस्तान का प्रधानमंत्री और मुल्ला अब्दुल गनी उर्फ मुल्ला बरादर को उप प्रधानमंत्री बनाया गया है । अगर दोनों के इतिहास की काली चिट्ठी खोली जाए तो कई काले कारनामे इनके सर पर सुसज्जित है जो तालिबान के नजर में इनके प्रधानमंत्री बनाने की काबिलियत है । वैसे तो तालिबान लगातार यह कह रहा है की वह अफगानिस्तान में एक अच्छी शाशन ब्यवस्था लाएगा मगर , उसके मंत्रालय के मंत्रियों के इरादे वैसे नहीं लगते । कहते हैं की जब नीवं ही खोखली हो तो उसपे बड़े बड़े महल टिकते नहीं है । बहरहाल अब देखना होगा की तालिबान के यह मंत्रालय किस तरह के सरकार की स्थापना करते है ।