मास्टर्स के बाद भी नौकरी न मिली तो खोल दी चाय की दूकान

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बड़े बुजुर्ग अक्सर कहते हैं कोई काम छोटा या बड़ा नहीं होता बस काम में शिद्दत और लगन होनी चाहिए फिर सफलता खुद चल के पास आ जाती है । दरसल पश्चिम बंगाल की एक पोस्ट ग्रेजुएट लड़की टुकटुकी दास ने नौकरी न मिलने पर एक चाय की दूकान खोल कर बड़े बुजुर्गों की इस कथन को सच कर दिखाया है। जी हाँ इंग्लिश से मास्टर्स करने के बाद भी टुकटुकी को कही जॉब न मिला हालाँकि टुकटुकी को इस बात का कोई अफ़सोस नहीं है उसने पछताने और सरकार को कोशने के बजाय हाबरा रेलवे स्टेशन के पास एक चाय की दूकान खोल ली और दूकान का नाम एमए इंग्लिश चायवाली नाम रख लिया । टुकटुकी की यह चाय की दूकान उत्तर 24 परगना के हाबरा स्टेशन के पास है । दरसल टुकटुकी के चाय दूकान के नाम के वजह से वह काफी चर्चा में रहती है सोशल मीडिया पर टुकटुकी के इस कारनामे के मशहूर होने के बाद ,दूर दूर से लोग टुकटुकी से मिलने आते है । अपने दूकान के यूनिक नाम के वजह से धीरे-धीरे वो काफी फेमस हो गईं. स्थानीय मीडिया ने भी उनकी कहानी प्रकाशित की ।

अगर टुकटुकी के माता पिता की बात करे तो पिता वैन ड्राइवर हैं और उनकी मां की एक छोटी सी किराना दुकान है। टुकटुकी ने अपने इंटरव्यू के दौरान बताया की उसके पेरेंट्स उसके इस फैसले से काफी नाखुश थे उन्होंने काफी समझाया । परन्तु कई मिन्नतों के बाद वे राजी हो गए । दरसल टुकटुकी एमबीए चायवाला से प्रभावित है जो कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर छाया हुआ था । टुकटुकी ने कहा कि मुझे लगा कि कोई भी काम छोटा नहीं होता और इसलिए मैंने ‘एमबीए चायवाला’ की तरह अपनी चाय की दुकान खोली. शुरुआत में जगह मिलना मुश्किल था, लेकिन बाद में मैं इसे ढूंढने में कामयाब रही. अब मैं चाय-नाश्ता बेच रही हूं, चूंकि मेरे पास एमए की डिग्री है, इसलिए मैंने दुकान का नाम इस तरह रखा. टुकटुकी अपना यू-ट्यूब चैनल भी चलाती हैं. उनके कई वीडियो वायरल हो चुके हैं. उन्होंने कहा, ‘जब से मैं वायरल हुई हूं, तब से बहुत लोग मिलने आते हैं, मुझे लोग हौसला देते हैं’.बहरहाल देश अपने इन हौसलों से बुलंद बेटियों को नमन करता है टुकटुकी ने वाकई ये शाबित कर दिया की शिक्षा हमें विनम्र और समझदार बनती है यह बताती है की कोई काम छोटा या बड़ा नहीं होता है । बस इरादा मजबूत और दृढ होना चाहिए ।