क्या सच में खतरनाक है कोरोना का नया वैरिएंट #Neocov ,जानिए क्या कहते हैं एक्सपर्ट 

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बीते समय के साथ कोरोना के नए नए वेरिएंट लोगों को पेरशान और डराने का काम कर रहा है। हाल ही में कोरोना के नए वैरिएंट NeocoV वायरस ने लोगों में दहशत का माहौल बना के रखा है। लोगों को इस बात को जानने की जिज्ञासा ज्यादा दिखाई दे रही है की यह वैरिएंट कोरोना के ब्याप्त वैरिएंट ओमिक्रोण वेरिएंट से कितना खतरनाक है। लोगों में डर किस तरह ब्याप्त है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है की गूगल के रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया गया है की , शुकवार 28 जनवरी तक भारत में यह 5 लाख सर्च के साथ टॉप पर रहा है. NeocoV वायरस कितना खतरनाक है इस बात को जानने की जिज्ञासा लोगों में बढ़ रही है। दरअसल यह जिज्ञासा उनके अंदर ब्याप्त डर की वजह से है। हालांकि इसके मूल अध्ययन में बताई गई बातों पर गौर करें तो अभी तक इसमें घबराने की कोई बड़ी वजह सामने नहीं आई है।

बीते दो सालों में कोरोना के नए नए वैरिएंट सामने आई है इसने लोगों के आम जीवन को काफी प्रभावित किया है। वो चाहे अल्फा हो , डेल्टा हो या ओमिक्रॉन हो या फिर चर्चा में आया हुआ NeocoV वैरिएंट हो हर नए वैरेंट के समय लोगों ने डर को महसूस किया है। हालाँकि स्वास्थय मंत्रालय ने कोरोना के इस नए वैरिएंट को ज्यादा खतरनाक अब तक नहीं बताया है। स्टडी के अनुसार NeoCoV कोरोना वायरस का कोई नया वैरिएंट नहीं है. इसकी तमाम बातें एक पीयर रिव्यू स्टडी का हिस्सा हैं जिसे चीनी वैज्ञानिकों के एक समूह ने जारी किया है और इसमें कुछ एक्सपर्ट वुहान यूनिवर्सिटी के भी हैं. हालांकि  NeoCoV को लेकर लोगों को इतनी जल्दी घबराने की जरूरत नहीं है। इस वायरस से न घबराने के पीछे का कारन है की NeoCoV , MERS-CoV से जुड़ा हुआ है। MERS-CoV वैसे कोरोना वायरस से ही जुड़ा हुआ है जो इंसानो को संक्रमित कर सकते है। 2010 के दशक में MERS-CoV सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और दक्षिण कोरिया में बड़े संकट की वजह बन चुका है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, MERS-CoV इंफेक्शन की चपेट में आए तकरीबन 35 प्रतिशत लोगों की मौत हो चुकी है. NeoCoV इस विशेष कोरोना वायरस का ही एक संभावित वैरिएंट है। NeoCoV को संक्षिप्त में समझें तो यह अभी तक खोजा गया MERS-CoV का निकटतम रिश्तेदार है जो चमगादड़ में पाया जाता है. NeoCoV संक्रमित करने के लिए कुछ प्रकार के बैट ACE2 (एक प्रकार की कोशिकाएं जिसे बायोलॉजी में रिसेप्टर्स कहा जाता है) का उपयोग कर सकता है. NeoCoV T510F म्यूटेशन के बाद मानव कोशिका को संक्रमित कर सकता है,यानी यह वायरस फिलहाल चमगादड़ में पाए जाते है और एक विशेष म्युटेंट के बाद जो की काफी मुश्किल और अधिक लम्बे समय में होने वाला प्रोसेस है। यही वजह है की एक्सपर्ट्स इसे उतना खतरनाक नहीं मान रहे हैं।