इस बार का पंचायत चुनाव कई मामलों में रहा ख़ास ,लगभग 60 प्रतिशत सीटों पर युवा चेहरों ने की जित हासिल

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बिहार पंचायत चुनाव के अंतिम चरण की गिनती आज हो रही है । अंतिम चरण में कुल 17,286 सीटों के चुनाव हुए हैं जिनका परिणाम 14-15 दिसंबर को आना है। आज और कल के निर्णय के साथ ही बिहार में पंचायत चुनाव समाप्त हो जाएंगे । बिहार में इस बार का पंचायत चुनाव कई मामलों में ख़ास रहा है इस पंचायत चुनाव में पहली बार EVM का इस्तेमाल हुआ जो की वोटर्स के लिए काफी आसान रहा और चुनाव में होने वाले गड़बड़ी को भी रोका जा सका । आकड़ो के लिहाज से भी यह चुनाव ख़ास रहा । पिछले पंचायत चुनाव के मुकाबले इस पंचायत चुनाव में 24 प्रतिशत वोट ज्यादा गिरे हैं । इसके अलावे इस चुनाव में प्रदेश में कुल 2 लाख 47 हजार 656 सीटों के लिए मतदान कराए गए जिसमे से अब तक 60 फीसदी से अधिक सीटों पर युवा चेहरों को जीत हासिल हुई। देश में युवाओं की भागीदारी देखते हुए यह कहा जा सकता है की गावं की जनता भी युवाओं को मौका देना चाहती है ।

राज्य निर्वाचन आयोग के आयुक्त डॉ. दीपक कुमार ने यह जानकारी दी की दसवें चरण तक के मतदान से संबंधित 1.48 लाख सीटों पर युवा चेहरे जीत हासिल किया है और 11 वे चरण में भी 60 प्रतिशत युवा चेहरे को ही जित मिलने की संभावनाएं हैं ।सूत्रों के अनुसार चुनाव जीतने वाले 50 फीसदी से अधिक उम्मीदवार 25 से 50 वर्ष के बीच की उम्र के हैं। बिहार पंचायत चुनाव इस बात से भी ख़ास रहा की इस बार महिलाओं की भागीदारी पिछले बार के मुकाबले ज्यादा रही है और महिलाओं ने कई सीटों पर जित दर्ज भी किया है ।अगर बात करे वोटिंग की तो चुनाव के प्रत्येक चरण में पुरुषों से ज्यादा महिलाओं ने वोट डाले हैं .आयोग के अनुसार प्रत्येक चरण के पंचायत चुनाव में पुरुषों की तुलना में पांच से दस फीसदी अधिक महिलाएं शामिल हुई और जीत भी हासिल की। पंचायत चुनाव के सभी चरणों में कुल 4,17,772 पुरुष उम्मीदवारों की तुलना में 4,74,917 महिलाएं चुनाव मैदान में उतरीं। चुनाव आयोग का कहना है की वह सभी नये चेहरे, युवा चेहरे, महिला एवं पुरुष उम्मीदवारों की जीत, शिक्षा सहित अन्य बिंदुओं पर समेकित रिपोर्ट तैयार करेगा। इसके लिए आयोग एक सॉफ्टवेयर भी बनवा रही है जो इन बिंदुओं पर करवाई करेगा । चूंकि चुनाव में सीटों की संख्या 2.47 लाख है, इसलिए इसे समेकित किए जाने में वक्त लगेगा। इसके साथ ही इस पंचायत चुनाव में लगभग 70 फ़िशादी पुराने मुखिया की हार दर्ज की गई है अकेले पटना में 90 पुराने मुखियों को हार का सामना करना पड़ा है । ग्रामीण स्तर पर भी लोकतंत्र का इतना सजग होना यह दर्शा रहा है की देश अब बदल रहा है । बहरहाल यह बदलाव की लहार किस किनारे तक पहुँचती है यह देखना अभी बाकी है ।