#omicron के सर्वाधिक निशाने पर रहा कौन और क्या रही वजह,अध्ययन में सामने आया चौंकाने वाला सच

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कोरोना की तीसरी लहर ओमिक्रोन वैरिएंट की वजह से आई। इस लहर में सर्वाधिक युवा चपेट में आए, जिनकी उम्र 44 वर्ष तक थी। यह आंकड़े इंडियन काउंसिल आफ मेडिकल रिसर्च (आइसीएमआर) के सर्वे में सामने आए हैं। इसके लिए देशभर के 37 अस्पतालों से दो अलग-अलग अवधि के 1520 संक्रमितों के आंकड़े लिए गए थे। आइसीएमआर ने विशेषज्ञों से उन संक्रमितों के आंकड़ों का तुलनात्मक अध्ययन कराया और पाया गया कि ओमिक्रोन की चपेट में आकर अस्पताल में भर्ती हुए संक्रमितों को पूर्व की स्थिति के मुकाबले कम दिक्कत हुई। सिर्फ गंभीर बीमारियों से पीडि़त (कोमोर्बिड कंडीशन) संक्रमितों को ही जटिलताएं हुईं। उन्हें आक्सीजन सपोर्ट देना पड़ा। सर्वे के पैनल में जीएसवीएम मेडिकल कालेज के माइक्रोबायोलाजी विभाग के प्रोफेसर डा. विकास मिश्रा भी रहे।

कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रोन का संक्रमण देश-दुनिया में तेजी से फैला था। दुनिया भर के विशेषज्ञ इसे कोरोना की तीसरी लहर का कारण बताने लगे थे। तेजी से संक्रमण फैलने से सभी सहमे हुए थे। हालांकि प्राथमिक तौर पर इसे हल्के संक्रमण वाला बताया जा रहा था। इसे ध्यान में रखते आइसीएमआर ने पूर्व के डेल्टा वैरिएंट से तुलनात्मक अध्ययन कराने का निर्णय लिया गया। इसके देश के 37 अस्पतालों से दो अलग अवधि के आंकड़े लिए गए।

डेल्टा वैरिएंट से संक्रमित होकर 564 मरीज अस्पताल में 15 नवंबर से लेकर 15 दिसंबर 2021 तक भर्ती हुए। उसमें पाया गया कि इन मरीजों की 60 प्रतिशत 55 वर्ष की उम्र के रहे, जिनमें संक्रमण अधिक रहा। वहीं, ओमिक्रोन से संक्रमित होकर 16 दिसंबर 2021 से लेकर 17 जनवरी 2022 के बीच अस्पताल में भर्ती हुए 956 मरीजों को सर्वे में शामिल किया गया। इसमें से 60 प्रतिशत संक्रमितों की उम्र 44 वर्ष रही।
इंडियन काउंसिल आफ मेडिकल रिसर्च (आइसीएमआर) ने ओमिक्रोन व डेल्टा वैरिएंट का तुलनात्मक अध्ययन कराया है। ओमिक्रोन से युवा अधिक प्रभावित हुए है। हालांकि अस्पताल में भर्ती किए गए लोगों में जटिलताएं नहीं हुईं। दोनों में सबसे बड़ा अंतर यह देखने में मिला कि डेल्टा में सांस लेने में दिक्कत और स्वाद-गंध जाने की समस्या हुई। वहीं, ओमिक्रोन में गले में खराश की समस्या अधिक रही, जबकि स्वाद-गंध की समस्या सबसे कम हुई।