सारण MLC चुनाव में किसका बजेगा डंका देखिए पूरी रिपोर्ट

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बिहार में MLC चुनाव को लेकर पार्टियों के बिच तैयारियां शुरू हो गई है। इस साल मई या जून में MLC का चुनाव होने की संभावना है ,हालाँकि इसे ले कर अब तक कोई निर्धारित तिथि नहीं दी गई है। बिहार के 75 एमएलसी सीटों में से 24 MLC सीटों पर चुनाव होने है। बिहार में विधायक ही विधानसभा क्षेत्रों से एमएलसी का चुनाव करते हैं। विधान परिषद विधानमंडल का ही अंग है,ये लोकतंत्र की ऊपरी प्रतिनिधि सभा है। इसके सदस्य अप्रत्यक्ष चुनाव के द्वारा चुने जाते हैं। कुछ सदस्य राज्यपाल के द्वारा मनोनित किए जाते हैं। इस वक़्त बिहार MLC चुनाव के पीछे का कारन MLC सीटों का खाली  हो जाना है। दरअसल बीते साल 17 जुलाई 2021 को 19 विधान पार्षद रिटायर हुए। तीन विधान पार्षद चुनाव लड़कर विधायक हो गए। दो विधान पार्षदों का निधन हो गया। इस लिए इन 24 सीटों पर ये चुनाव होना है। इन सीटों पर चुनाव के लिए बीजेपी ,जदयू और महागठबंधन सरकार से  यानी राजद और कांग्रेस दोनों अलग अलग कैंडिडेट उतारेंगे। तेजस्वी ने MLC चुनाव पर यह साफ़ कर दिया था की महागठबंधन की सर्कार केवल केंद्र में शाशन के लिए ही मान्य है जिसके बाद कांग्रेस ने स्वतंत्र रूप से अपना प्रतिनिधि खरा करने का निर्णय लिया है। बिहार के अन्य जिलों के साथ अगर सारण जिले की बात की जाए तो MLC चुनाव को लेकर सारण की चुनावी सतरंज समझने में थोड़ी मुश्किल हो सकती है। आपकी जानकारी के लिए बता दे की राजद ने एमएलसी के 20 सीटों पर अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिया है जिसमे सारण से चुनाव लड़ रहें है ब्रह्मण जाती से सम्बन्ध रखने वाले सुधांशु रंजन पांडेय यह एक लम्बे समय तक राजद के कैडर रहे हैं।  बताया जा रहा है कि RJD ने इस बार टिकट अपने उन कैडर नेताओं को दिया है जो कमर से मजबूत, यानी धन-बल से दमदार हैं। पार्टी ने इसका भी ख्याल रखा है कि ज्यादातर उम्मीदवार 50 से कम उम्र के हो। यही कारण है की कॉंग्रेस पार्टी के सक्रिय प्रदेश युवा कांग्रेस के पूर्व महासचिव सुशांत कु सिंह क़ा नाम. भी सामने आ रहा जो सारण के सीट से शंखनाद कर सकते हैंहालाकि छपरा की राजनीति पर उनकी पकड़ मजबूत मानी जा रही है.और कांग्रेस के उच्च स्तरीय मैनेजमेंट लेवल पर इनकी सक्रियता रही है यही कारण है कि सुशांत कु सिंह इस बार सारण विधानपरिषद से कॉंग्रेस के सक्रिय उम्मीदवार के तौर पर देखें जा रहें हैं..


इसके अलावे अगर जदयू की बात करे तो जदयू  और भाजपा के गठबंधन वाली NDA सरकार में एमएलसी चुनाव को लेकर सीटों का बटवारा हो चूका है। दोनों के बिच आधे आधे का आंकड़ा रहना है। यानी 24 विधान परिषद् सीट में दोनों पार्टियां  12 और  11  सीटों पर चुनाव लड़ेगी। जिसमे १२ सीट बीजेपी के खेमे में जायेगी जबकि 11 सीट पर जदयू अपने उमीदवार खरा करेगी।  बिहार बीजेपी के प्रभारी भूपेंद्र यादव ने यह घोषणा किया है। हालाँकि अभी तकउम्मीदवारों के नाम घोषित नहीं किये गए है परन्तु ऐसा कयास लगाया जा रहा है की की सारण की सीट से बीजेपी सच्चिदान्द को उतार सकती है। आपकी जानकारी के लिए बता दें की सच्चिदानंद राय  एक बहुत बड़े व्यापारी हैं और कभी नितीश कुमार के खाफी करीबी रह चुके हैं। परन्तु राजद और जदयू के महागठबंधन के बाद इन दोनों के रिश्ते में खट्टास आ गई है। यही कारन है की नितीश कुमार यह नहीं चाहते की सच्चिदान्द MLC चुन कर परिषद्हा में आये। चुकी छपरा की सीट बीजेपी के खेमे में है तो सच्चिदानंद का लड़ना लगभग तय हो चूका है। हालाँकि  सच्चिदान्द राय के तरफ से भी अभी कोई बयान सामने नहीं आया है। सचिदानंद के अलावे बीजेपी अपने उमीदवार के तौर पर शंकर सिंह को भी मौका दे सकती है। शंकर यादव फिलहाल पप्पू यादव की पार्टी जन अधिकार पार्टी  के हिस्सा है और प्रदेश सचिव भी है। परन्तु शंकर सिंह MLC चुनाव में भाजपा के तरफ से छपरा के सीट पर लड़ सकते हैं। दरअसल संजय सिंह तारकेश्वर सिंह से सम्बंधित है जो बीजेपी के एक जाने माने चेहरे हैं। अब संजय सिंह तारकेश्वर सिंह के नाम पर अपना समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहें हैं। आपको बता दे की संजय सिंह 2020  विधान सभा चुनाव में तरैया विधान सभा से जाप की पार्टी के तरफ से लड़ चुके हैं जिसमे उनकी बुरी तरह हार हो चुकी थी और अब वह बीजेपी के तरफ से MLC चुनाव में हाथ आजमाना चाहते हैं। हालांकि इस बात की पुष्टि उनके तरफ से नहीं की गई है। हमारे सूत्रों के हवाले मिली जानकारी को हम आपके साथ साझा कर रहे हैं। बहरहाल राजद की तरह बीजेपी और जदयू दोनों अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित कर देगी । दरअसल एमएलसी चुनाव में अधिकतर टिकट वैसे लोगों को ही मिलती है जो ज्यादा पैसे खर्च कर सकते हैं या उनका दबदबा ज्यादा होता है हालाँकि बिहार के लगभग हर विधान सभा या विधान परिषद् के चुनाव में सीट पाने के लिए यह योग्यता होना जरुरी ही हो जाता है। परन्तु विधान परिषद् चुनाव में यह ज्यादा देखा जाता है। बहरहाल जब तक NDA की दोनों पार्टियां अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित नहीं कर देती तब तक यह कह पाना मुश्किल है की छपरा सीट से किस पार्टी का डंका बजेगा।