रेलवे के परीक्षा में पास न होने के कारन विद्यार्थी ने कर ली आत्महत्य,आखिर इसका जिम्मेदार कौन

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आरआरबी एनटीपीसी की रिजल्ट 15 जनवरी को जारी किया गया है। लगभग दो साल बाद हुए परीक्षा का रिजल्ट एक साल और बाद आया है,यानी फॉर्म भरने से लेकर इसका एग्जाम देने में लगभग ३ साल लग गए हैं उसके बाद भी कीउच्च स्टूडेंट्स ने रेलवे बोर्ड पर सही तरीके से रिजल्ट न देना का आरोप लगाया है। रिजल्ट में घोटाला होने की बात कही जा रही है। दरअसल रेलवे बोड ने कहा था की वह वास्तविक रिजल्ट से 20 गुना अधिक रिजल्ट देगा जबकि रिजल्ट में एक ही अभियार्थी का रिजल्ट 5, 5 बार दिया गया है। ऐसे में अभियार्थी इस पर अपना आक्रोश जाता रहे हैं। इसी क्रम में भागलपुर के एक क्षात्र ने रेलवे के परीक्षा में पास न होने की वजह से आत्महत्या कर लिया। क्षात्र का नाम चन्दन बताया जा रहा है। दरअसल चन्दन प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करता था ,उसके पिता ठेला चला कर अपने परिवार और चन्दन के पढ़ाई का खर्च उठाते थे। पिता को चन्दन से काफी उमीदें थी परन्तु प्रतियोगी परीक्षा में पास न होने के दुःख से चन्दन ने आत्महत्या कर लिया। अब सवाल यह है की इसका जिम्मेदार कौन है ? एक तो रेलवे बोर्ड अपने परीक्षाओं को काफी देर से कंडक्ट करती है और उसके बाद रिजल्ट देने में समय लगाती है इन सब के बाद रिजल्ट में स्कैम भी हो जाता है।

अब ऐसे में रेलवे की तैयारी कर रहे युवाओं की उम्र दो या तीन एटेम्पट में ही ख़तम हो जाती है और उसके सरकारी नौकरी के सपने टूट जाते हैं ऐसे में किसी लड़के का जिंदगी से हताहत होना लाजमी है। आरआरबी इन बच्चों के जीवनके साथ खेल रही है। भारत में आज बेरोजगारी दर ७.३० से बढ़ रही है ,हर साल लगभग ४० लाख स्टूडेंट्स ग्रेजुएट होते हैं , इसमें से लगभग ८ लाख स्टूडेंट्स आगे की पढ़ाई जारी रखते है परन्तु हर साल ग्रेजुएट हुए स्टूडेंट्स का केवल 3.5 प्रतिशत ही स्टूडेंट्स सरकारी नौकरी पाते हैं। अब आप यह अंदाजा लगा सकते है की देश में बेरोजगारी दर इतना क्यों बढ़ रहा है। ऐसे में रेलवे और बाकी प्रतियोगी परीक्षाओं में इस तरह की बुरोक्रेसी विध्यातियों के जीवन के लिए घातक शाबित हो रही है। भारत सरकार को इस पर जल्द से जल्द कोई ठोस कदम उठाना चाहिए।