जनसँख्या कानून को लेकर बिहार में भी आवाजे उठनी शुरू विधानसभा सत्र में गूंजा

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भारत में जनसँख्या नियंत्रण कानून को लागू करने के लिए कई हाथ खरे हो रहे हैं । उत्तरप्रदेश सरकार ने तो इसे लागू भी कर दिया है । अब इसी हवा बिहार में भी पहुंच चुकी है । हालाँकि मुख्यमंत्री नितीश कुमार ने पहले ही अपने विचार को जनता के सामने रख दिया है । उन्होने सीधा सीधा कह दिया है की जनसँख्या कानून की जरुरत बिहार में नहीं है ,यहाँ केवल लोगों को जागरूक करने की जरुरत है । परन्तु नितीश के इस बात पर शायद हर कोई सहमत नहीं है । गौरतलब है की बिहार विधानसभा में मानसून सत्र की शुरुआत हो चुकी है और बिधानसभा में विधायकों की मांग गूंज रही है । बुधवार को हुए विधानसभा की बैठक में जनसँख्या कानून की भी गूंज सुनाई दी । नाकर्षण प्रस्‍ताव के माध्यम से कई विधायकों ने दो बच्चों के प्रावधान को बिहार में लागू करने की मांग उठाई। इसके साथ ही उन्‍होंने जनसंख्या पर वर्ष 1999 की करुणाकरण कमेटी के सुझावों को लागू करने की भी मांग की। इस बीच इस मुद्दे पर राष्‍ट्रीय जनता दल (राजद) का स्‍टैंड साफ करते हुए पार्टी के मुख्‍य प्रवक्‍ता भाई वीरेन्‍द्र ने कहा कि भाजपा लोकप्रियता हासिल करने वाले मुद्दे को ही उछालती है। जनसंख्या नियंत्रण को लेकर सर्वदलीय बैठक में विचार होना चाहिए। बिहार की फिलहाल आबादी लगभग साढ़े दस कड़ोर है जो की जनसख्या के दृष्टि से बिहार भारत का तीसरा तथा जनसँख्या के दृष्टि से देश का 12 वा राज्य है ।

ऐसे में बढ़ती जनसँख्या बिहार के लिए परेशानी का कारण बन सकता है । विधायक अवधेश सिंह, विजय कुमार खेमका, कृष्‍ण कुमार ऋषि और डॉ सुनील कुमार ने यह मांग उठाई। भाजपा विधायक विजय खेमका ने कहा उन्हें पूरी उम्मीद है कि उनकी यह मांग सुनी जाएगी। बिहार में भी जनसंख्या नियंत्रण कानून बनना चाहिए। जबकि jdu के विधायक विधायक विनय चौधरी ने इस मांग की विरोध की और कहा की बिहार में सिर्फ जागरूकता अभियान की जरुरत है । और किसी भी तरह से जनसँख्या कानून को लगाने की जरुरत नहीं है । फिलहाल इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक घोसना नहीं हुई है बिहार सरकार इस मुद्दे पर क्या एक्शन लेगी देखना होगा ।